
झालावाड़ शहर में शुक्रवार सुबह एक ऐसी दर्दनाक घटना सामने आई, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। शहर के भाटिया वर्कशॉप क्षेत्र में आवारा कुत्तों के झुंड ने दो साल की मासूम बच्ची पर हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोग प्रशासन और नगर परिषद की लापरवाही पर सवाल उठा रहे हैं।https://www.facebook.com/share/v/18AMNzYE1o/
जानकारी के अनुसार मृतक बच्ची की पहचान गोरी के रूप में हुई है। गोरी अपने पिता राजू लाल के साथ भाटिया वर्कशॉप के पास बने एक अस्थायी टेंट में रह रही थी। शुक्रवार सुबह करीब 6 बजे बच्ची अपने पिता के साथ टेंट के बाहर सो रही थी। इसी दौरान सात से आठ आवारा कुत्ते वहां पहुंचे और बच्ची को उठाकर करीब 50 मीटर दूर ले गए।
बच्ची की चीख सुनकर पिता राजू लाल की नींद खुली। उन्होंने तुरंत कुत्तों का पीछा किया और मदद के लिए शोर मचाया। जब तक वह मौके पर पहुंचे, तब तक कुत्ते बच्ची को बुरी तरह नोच चुके थे। राजू लाल ने किसी तरह कुत्तों को भगाया और गंभीर हालत में बच्ची को गोद में उठाकर तुरंत एसआरजी अस्पताल पहुंचे।
अस्पताल में चिकित्सकों ने बच्ची का परीक्षण किया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। अस्पताल सूत्रों के अनुसार बच्ची के पेट, माथे, हाथ-पैर और शरीर के कई हिस्सों पर 30 से 40 गंभीर घाव पाए गए। अत्यधिक खून बहने और गहरे जख्मों के कारण बच्ची की जान नहीं बच सकी।
घटना के बाद अस्पताल परिसर में परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। मासूम की मौत की खबर सुनते ही इलाके के लोग भी बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंच गए। हर किसी की आंखें नम थीं और लोग इस दर्दनाक हादसे को लेकर स्तब्ध नजर आए।
परिजनों ने बताया कि राजू लाल मूल रूप से बारा जिले के भंवरगढ़ क्षेत्र के रहने वाले हैं। वह करीब डेढ़ महीने पहले काम की तलाश में झालावाड़ आए थे। परिवार भाटिया वर्कशॉप के पास टेंट लगाकर रह रहा था। राजू लाल शादी-ब्याह और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों में ढोल बजाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण परिवार अस्थायी टेंट में रहने को मजबूर था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि भाटिया वर्कशॉप और आसपास के इलाके में लंबे समय से आवारा कुत्तों का आतंक बना हुआ है। क्षेत्र में दो दर्जन से अधिक कुत्ते झुंड बनाकर घूमते रहते हैं। सुबह और रात के समय राहगीरों तथा बच्चों पर हमला करने की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। लोगों ने कई बार नगर परिषद और प्रशासन से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
इलाके के निवासियों का कहना है कि यदि समय रहते आवारा कुत्तों को पकड़ने और नियंत्रण की कार्रवाई की जाती तो शायद मासूम गोरी की जान बच सकती थी। घटना के बाद लोगों में प्रशासन के खिलाफ भारी नाराजगी देखी जा रही है। कई लोगों ने आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने की मांग की है।
गौरतलब है कि राजस्थान में हाल के समय में आवारा कुत्तों के हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। छोटे बच्चों और बुजुर्गों पर हमलों की खबरें चिंता का विषय बन चुकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि शहरों में बढ़ती गंदगी, खुले में फेंका जाने वाला कचरा और समय पर नसबंदी व नियंत्रण अभियान नहीं चलने से आवारा कुत्तों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
इस घटना ने एक बार फिर नगर निकायों की व्यवस्थाओं और आवारा पशुओं को लेकर प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा हो सकती हैं।
फिलहाल पुलिस और प्रशासन ने मामले की जानकारी लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है। वहीं मासूम गोरी की दर्दनाक मौत ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया है।