झालावाड़: एसआरजी अस्पताल के पालना गृह में 4-5 दिन की नवजात को छोड़कर गई महिला, बाल कल्याण समिति ने संभाली जिम्मेदारी

झालावाड़। शहर के एसआरजी अस्पताल के पालना गृह में बुधवार सुबह एक महिला नवजात शिशु को छोड़कर चली गई। घटना की सूचना सुबह करीब 10 बजे अस्पताल प्रशासन को मिली। जानकारी मिलते ही अस्पताल स्टाफ में हलचल मच गई और शिशु को तत्काल सुरक्षित अपने संरक्षण में लेकर नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों की टीम ने तुरंत प्राथमिक उपचार और निगरानी शुरू कर दी।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार नवजात करीब चार से पांच दिन की बताई जा रही है। हालांकि, चिकित्सकों का कहना है कि विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण और आवश्यक जांचों के बाद ही शिशु की सही उम्र और स्वास्थ्य की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। अस्पताल प्रशासन के अनुसार शिशु का वजन, तापमान, संक्रमण की संभावना और अन्य जरूरी मेडिकल पैरामीटर की जांच की जा रही है। फिलहाल नवजात को विशेष निगरानी में रखा गया है और उसकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है।
पालना गृह में नवजात मिलने की सूचना मिलते ही अस्पताल प्रशासन ने नियमानुसार आगे की कार्रवाई शुरू की। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि पालना गृह ऐसी ही परिस्थितियों के लिए बनाया गया है
, ताकि कोई भी व्यक्ति असहाय स्थिति में शिशु को सुरक्षित स्थान पर छोड़ सके और उसकी जान को खतरा न हो। इस व्यवस्था के तहत शिशु की पहचान गोपनीय रखी जाती है और तुरंत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने तुरंत बाल कल्याण समिति को सूचना दी। सूचना मिलते ही समिति के अध्यक्ष और सदस्य अस्पताल पहुंचे। बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष ने बताया कि सूचना मिलते ही समिति और अस्पताल स्टाफ मौके पर पहुंचा तथा शिशु की पूरी तरह निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि नवजात पूरी तरह सुरक्षित है और चिकित्सा टीम उसकी देखभाल कर रही है।
अध्यक्ष ने यह भी बताया कि नियमानुसार आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। शिशु की मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद उसे समिति के संरक्षण में लिया जाएगा और बाल संरक्षण से संबंधित सभी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। आवश्यकता पड़ने पर शिशु को अधिकृत अभिरक्षा गृह या दत्तक ग्रहण प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में बच्चे के हित को सर्वोपरि रखा जाता है और उसकी सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं भविष्य को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाता है।

अस्पताल प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि यदि किसी कारणवश कोई परिवार नवजात की परवरिश करने में असमर्थ हो, तो उसे असुरक्षित स्थान पर छोड़ने के बजाय पालना गृह जैसी सुरक्षित व्यवस्था का उपयोग करें, ताकि बच्चे का जीवन सुरक्षित रह सके। फिलहाल डॉक्टरों की टीम नवजात की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और सभी आवश्यक जांचें की जा रही हैं।
घटना के बाद अस्पताल परिसर में चर्चा का माहौल बना रहा, वहीं प्रशासनिक अमला पूरे मामले पर सतर्क है। नवजात की हालत फिलहाल स्थिर है और उसे पूर्ण चिकित्सकीय देखरेख में रखा गया है। बाल कल्याण समिति द्वारा आगे की कार्रवाई प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी।
अश्वगंधा की खेती बनी मुनाफे का सौदा, खोद गांव के किसानों ने दिखाई नई राह

झालावाड़ जिले में पारंपरिक फसलों के साथ अब औषधीय खेती की ओर किसानों का रुझान तेजी से बढ़ रहा है। विशेष रूप से अश्वगंधा की खेती ग्रामीण क्षेत्रों में आय का नया स्रोत बनकर उभर रही है। जिले के गांव खोद के किसान पूनम पटेल और प्रहलाद मेघवाल ने बताया कि कम लागत और बेहतर बाजार मूल्य के कारण अश्वगंधा की खेती किसानों के लिए लाभकारी विकल्प साबित हो रही है।
अश्वगंधा की पैदावार और खेती का तरीका
अश्वगंधा एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधा है, जिसका उपयोग आयुर्वेदिक दवाइयों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। इसकी पैदावार मिट्टी की उर्वरता, सिंचाई की उपलब्धता और खेत प्रबंधन पर निर्भर करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक एकड़ जमीन से औसतन 400 से 500 किलोग्राम तक सूखी जड़ें और लगभग 40 से 60 किलोग्राम बीज प्राप्त हो सकते हैं।
पूनम पटेल ने बताया कि अश्वगंधा की बुवाई जुलाई-अगस्त में की जाती है और लगभग 5 से 6 माह में फसल तैयार हो जाती है। इसकी खेती के लिए हल्की दोमट या बलुई मिट्टी उपयुक्त रहती है। अधिक सिंचाई की आवश्यकता नहीं होने से यह फसल कम पानी वाले क्षेत्रों में भी आसानी से ली जा सकती है। उन्होंने बताया कि पारंपरिक फसलों की तुलना में इसमें कीट और रोग का प्रकोप भी कम रहता है, जिससे लागत घटती है।
लागत और लाभ

प्रहलाद मेघवाल के अनुसार, एक एकड़ में अश्वगंधा की खेती पर लगभग 15 से 20 हजार रुपये तक की लागत आती है, जिसमें बीज, जुताई, खाद और मजदूरी शामिल है। यदि औसतन 450 किलोग्राम जड़ें और 50 किलोग्राम बीज प्राप्त होते हैं तो वर्तमान बाजार दर के हिसाब से किसानों को अच्छा मुनाफा मिल सकता है।
सूखी जड़ें करीब 90 रुपये प्रति किलोग्राम और बीज लगभग 75 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिक रहे हैं। इस हिसाब से एक एकड़ से किसान 40 से 50 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर सकते हैं। किसानों का कहना है कि यदि बाजार भाव अच्छा मिल जाए तो मुनाफा और अधिक हो सकता है।
अश्वगंधा का प्रमुख बाजार
अश्वगंधा के व्यापार के लिए मध्य प्रदेश के नीमच और मंदसौर देश-विदेश में प्रसिद्ध हैं। यहां हर साल बड़ी संख्या में आयातक, खरीदार, प्रोसेसर, पारंपरिक व्यापारी और आयुर्वेदिक कंपनियों के प्रतिनिधि पहुंचते हैं। ये व्यापारी अश्वगंधा की सूखी जड़ें और बीज खरीदकर देश के विभिन्न हिस्सों तथा विदेशों में आपूर्ति करते हैं।
किसानों का कहना है कि बड़े पैमाने पर उत्पादन करने से पहले बाजार की जानकारी लेना जरूरी है। हर्बल और आयुर्वेदिक कंपनियों से सीधे संपर्क स्थापित करना लाभकारी साबित हो सकता है। कई किसान समूह बनाकर सामूहिक रूप से अपनी उपज बेचने की योजना भी बना रहे हैं, ताकि उन्हें बेहतर भाव मिल सके।
औषधीय महत्व
अश्वगंधा को आयुर्वेद में अत्यंत महत्वपूर्ण जड़ी-बूटी माना जाता है। इसका उपयोग रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, तनाव कम करने और शरीर की ऊर्जा बढ़ाने वाली दवाइयों में किया जाता है। देश में आयुर्वेदिक और हर्बल उत्पादों की बढ़ती मांग के चलते अश्वगंधा की खपत में लगातार वृद्धि हो रही है। यही कारण है कि किसान इसे नकदी फसल के रूप में अपनाने लगे हैं।
सरकारी प्रोत्साहन और संभावनाएं
औषधीय खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग द्वारा समय-समय पर प्रशिक्षण और मार्गदर्शन दिया जाता है। यदि किसानों को बीज, तकनीकी जानकारी और विपणन सहायता मिले तो अश्वगंधा की खेती बड़े स्तर पर विकसित हो सकती है।

पूनम पटेल और प्रहलाद मेघवाल का कहना है कि यदि प्रशासन और कृषि विभाग की ओर से विपणन की बेहतर व्यवस्था हो जाए तो जिले के कई किसान पारंपरिक फसलों से हटकर औषधीय खेती की ओर रुख कर सकते हैं। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी बल्कि क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
निष्कर्ष
झालावाड़ के गांव खोद में अश्वगंधा की सफल खेती यह दर्शाती है कि सही जानकारी और बाजार से जुड़ाव होने पर किसान पारंपरिक खेती से हटकर भी बेहतर आय अर्जित कर सकते हैं। कम लागत, कम पानी और स्थिर बाजार मांग के कारण अश्वगंधा भविष्य की लाभकारी फसल बन सकती है। किसानों का मानना है कि यदि वे संगठित होकर उत्पादन और विपणन की रणनीति अपनाएं तो जिले को औषधीय खेती का प्रमुख केंद्र बनाया जा सकता है।
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संवेदनहीन और विजनलेस बजट से जनता ठगी गई” मनोहरथाना कांग्रेस प्रत्याशी विधायक नेमीचंद मीणा का भाजपा सरकार पर तीखा हमला,,,,,

- “संवेदनहीन और विजनलेस बजट से जनता ठगी गई” मनोहरथाना कांग्रेस प्रत्याशी विधायक नेमीचंद मीणा का भाजपा सरकार पर तीखा हमला,,,,,
झालावाड़।राजस्थान सरकार के हालिया बजट को लेकर प्रदेश में सियासी घमासान तेज हो गया है। मनोहरथाना विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस प्रत्याशी विधायक नेमीचंद मीणा ने राज्य सरकार के बजट को “संवेदनहीन, गुमराह करने वाला और जनता को ठगने वाला” करार देते हुए भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने कहा कि यह बजट प्रदेश के इतिहास का सबसे निराशाजनक बजट साबित होगा। किसानों, मजदूरों, बेरोजगार युवाओं, गरीबों, दलितों, आदिवासियों, महिलाओं और अति पिछड़े वर्गों को इस बजट से भारी निराशा हाथ लगी है।
मीणा ने आरोप लगाया कि बजट में केवल घोषणाओं का पुलिंदा है, लेकिन धरातल पर कोई ठोस विजन नजर नहीं आता। सरकार पुरानी योजनाओं का नाम बदलकर नई उपलब्धि बताकर आमजन को गुमराह कर रही है।
“फ्री बिजली के नाम पर धोखा, स्मार्ट मीटर से बढ़ा बोझ”
कांग्रेस प्रत्याशी विधायक नेमीचंद मीणा ने कहा कि भाजपा सरकार ने फ्री बिजली के नाम पर गरीबों को भ्रमित किया है, जबकि दूसरी ओर स्मार्ट मीटर लगाकर उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है।
उन्होंने कहा कि जनकल्याणकारी योजनाओं पर सिर्फ लीपा-पोती की जा रही है और सरकार आमजन की जेब पर लगातार चोट कर रही है।
“ब्रांडिंग में व्यस्त सरकार, जमीनी विकास नदारद”
मनोहरथाना कांग्रेस प्रत्याशी विधायक नेमीचंद
मीणा ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार करोड़ों रुपये प्रचार-प्रसार और ब्रांडिंग पर खर्च कर रही है, जबकि जमीनी स्तर पर विकास के दावे खोखले साबित हो रहे हैं।
उन्होंने क्षेत्र में बढ़ते भ्रष्टाचार का भी मुद्दा उठाया और कहा कि जनता अब “पर्ची की सरकार” और “झूठे दावों वाली सरकार” को समझ चुकी है।
*“विद्यालय खुले आसमान के नीचे, और सरकार बजट का ढोल पीट रही”****
नेमीचंद मीणा ने शिक्षा और मूलभूत सुविधाओं को लेकर सरकार को घेरा। उन्होंने हाल ही में झालावाड़ जिले के पीपलोदी में हुए स्कूल भवन हादसे का जिक्र करते हुए कहा—
“हाल ही में झालावाड़ जिले में पीपलोदी स्कूल भवन हादसे के बाद जर्जर भवनों को जमीनदोज किया गया। आज कई विद्यालय खुले आसमान के नीचे चल रहे हैं और आप बजट की बात कर रहे हो। ऐसे बजट पर शर्म आना चाहिए। यह देश का बड़ा दुर्भाग्य है कि आज भी इस तरह की स्थिति बनी हुई है।”
उन्होंने कहा कि जब विद्यालयों में सुरक्षित भवन, शुद्ध पेयजल और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, तब सरकार की बड़ी-बड़ी बजट घोषणाएं केवल दिखावा मात्र हैं।
“सरकार राजनीतिक कोमा की ओर”
कांग्रेस प्रत्याशी विधायक नेमीचंद
मीणा ने तीखे शब्दों में कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार राजनीतिक रूप से “कोमा” की स्थिति में पहुंचती नजर आ रही है और जनता आने वाले समय में इसका जवाब देगी।
उन्होंने कहा कि यह बजट विकास का नहीं, बल्कि भ्रम और प्रचार का दस्तावेज है, जिससे प्रदेश की जनता पूरी तरह निराश है।
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*सड़क दुर्घटनाओं में घायलों की जान बचाने राहतवीरों का किया सम्मान* *सड़क दुर्घटना में बिना किसी भय और संकोच के घायल व्यक्ति की करें सहायता – जिला कलक्टर*

झालावाड़, 09 फरवरी। जिला एवं पुलिस प्रशासन द्वारा भारत सरकार की राहतवीर योजना के तहत दिसम्बर 2025 व जनवरी 2026 माह में सड़क दुर्घटनाओं में घायलों की समय पर सहायता कर उनकी जान बचाने वाले 20 राहतवीरों को सोमवार को जिला कलक्टर अजय सिंह राठौड़ एवं पुलिस अधीक्षक अमित कुमार बुडानिया ने मिनी सचिवालय के सभागार में प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
इस अवसर पर जिला कलक्टर अजय सिंह राठौड़ ने कहा कि सड़क दुर्घटनाएँ आज हमारे समाज के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुकी हैं। हर दुर्घटना केवल एक आँकड़ा नहीं होती, बल्कि एक परिवार का सपना, किसी माता-पिता की उम्मीद और किसी बच्चे का भविष्य उससे जुड़ा होता है। दुखद तथ्य यह है कि कई बार समय पर सहायता न मिलने के कारण घायल व्यक्ति की जान चली जाती है, जबकि थोड़ी-सी तत्परता और मानवीय संवेदना से उसे बचाया जा सकता है।
इसी उद्देश्य से जिला एवं पुलिस प्रशासन द्वारा “राहतवीर योजना” प्रारंभ की गई है। यह योजना उन संवेदनशील, साहसी और जिम्मेदार नागरिकों को सशक्त बनाने की पहल है, जो सड़क दुर्घटना की स्थिति में बिना किसी भय और संकोच के घायल व्यक्ति की सहायता के लिए आगे आते हैं।
राहतवीर योजना के अंतर्गत आमजन द्वारा दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को प्राथमिक उपचार देने, पुलिस को त्वरित सूचना देने, एंबुलेंस बुलाने तथा घायल को सुरक्षित रूप से चिकित्सालय पहुँचाने का कार्य किया जाता है। साथ ही, गुड सेमेरिटन कानून के तहत यह सुनिश्चित किया गया है कि मदद करने वाले व्यक्ति को किसी भी प्रकार की कानूनी या प्रशासनिक परेशानी का सामना न करना पड़े।
जिला कलक्टर ने आमजन से आह्वान किया कि आप न केवल स्वयं सजग रहें, बल्कि समाज में भी यह संदेश फैलाएँ कि दुर्घटना के बाद सबसे कीमती चीज़ समय होता है। आपकी एक पहल, एक फोन कॉल या कुछ मिनट की सहायता किसी की पूरी ज़िंदगी बचा सकती है। यदि आप सड़क पर किसी दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को देखें, तो मूक दर्शक न बनें। मानवता के नाते आगे आएँ, सहायता करें और आवश्यकता पड़ने पर राहतवीरों या पुलिस को तुरंत सूचित करें। यह समझें कि आज जो मदद आप किसी और को देंगे, कल वही मदद आपके या आपके अपनों के लिए जीवन रक्षक बन सकती है।
पुलिस अधीक्षक अमित कुमार बुडानिया ने बताया कि राहतवीर योजना के सफल परिणाम सामने आने लगे हैं। अब राहतवीर पूर्ण तत्परता से लोगों की जान बचाने का पुण्य कार्य कर रहे हैं। पुलिस विभाग द्वारा की जाने वाली सख्ती से भी इसके सुखद परिणाम मिले हैं। ड्रिंक एंड ड्राइव के मामलों में पुलिस पूरी सख्ती बरत रही है और ऐसे चालकों के लाइसेंस सस्पेंड किए जा रहे हैं। इस प्रयास से जिले में सड़क दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है। उन्होंने कहा कि आप सभी के सहयोग से इस कार्य को हम निरन्तर बनाए रखेंगे।
उन्होंने बताया कि जनवरी माह की पिछले तीन वर्षों की तुलना की जाए तो 2024 में जहां 35 सड़क दुर्घटनाएं हुई और उनमें 15 लोगों की मौत हुई एवं 35 घायल हुए। वहीं 2025 में 41 प्रकरण सामने आए जिनमें 18 लोगों की मृत्यु हुई एवं 42 घायल हुए। जनवरी 2026 में 46 सड़क दुर्घटनाओं में 17 लोगों की मृत्यु हुई एवं 38 व्यक्ति घायल हुए हैं।
*इन राहतवीरों का किया गया सम्मान*
राहतवीर योजना के तहत दिसम्बर-2025 व जनवरी-2026 माह के लिए चयनित राहतवीरों धनसिंह, निखिल सोनी, जोहब आलम, दिनेश कुमार, यश शर्मा, राघवेन्द्र सिंह, विष्णु, टीकमसिंह, प्रवीण बंजारा, रवि, चन्द्रशेखर, रोशन दांगी, बुद्धराज सिंह, दिनेश गुर्जर, पवन, सुरेश चन्द्र वर्मा, भगवान सिंह मीणा, प्रदीप नागर, गोविन्द उर्फ सागर माली, विकास कुमार को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
इस दौरान अतिरिक्त जिला कलक्टर अनुराग भार्गव, जिला परिवहन अधिकारी समीर जैन, जिला दुर्घटना राहत समिति के सदस्यगण सहित प्रिन्ट एवं इलेक्ट्रानिक मीडिया के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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एमडी ड्रग नेटवर्क पर बड़ी चोट: झालावाड़ में 3 क्विंटल केमिकल जब्त, एमपी की ड्रग फैक्ट्री से जुड़ा तार, 5 आरोपी डिटेन

झालावाड़। जिले में नशे के खिलाफ चल रही मुहिम के तहत झालरापाटन पुलिस और जिला स्पेशल टीम (DST) ने एक बड़ी अंतरराज्यीय कार्रवाई को अंजाम देते हुए एमडी (MD) जैसे घातक मादक पदार्थ बनाने में इस्तेमाल होने वाले केमिकल की बड़ी खेप जब्त की है। इस कार्रवाई में मध्यप्रदेश में संचालित एक अवैध ड्रग फैक्ट्री का भी खुलासा हुआ है। पुलिस ने घरेलू सामान की आड़ में पिकअप वाहन से ले जाए जा रहे करीब 3 क्विंटल से अधिक संदिग्ध केमिकल, एक लग्जरी वाहन और 5 आरोपियों को डिटेन किया है। यह पूरी कार्रवाई डीआरआई जयपुर से मिले पुख्ता इनपुट के आधार पर की गई।
पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने प्रेस वार्ता में बताया कि नशे के सौदागरों के खिलाफ लगातार निगरानी और खुफिया तंत्र को सक्रिय रखा गया है। इसी क्रम में डीआरआई जयपुर से सूचना मिली थी कि एमडी बनाने में उपयोग होने वाला केमिकल झालावाड़ क्षेत्र से होकर मध्यप्रदेश भेजा जाने वाला है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए झालरापाटन पुलिस और जिला स्पेशल टीम की संयुक्त टीम गठित की गई।
एसपी अमित कुमार ने बताया कि टीम ने झालरापाटन थाना क्षेत्र के चंद्रावती ग्रोथ सेंटर चौराहे पर संदिग्ध अवस्था में खड़े दो वाहनों पर नजर रखी। इनमें एक पिकअप वाहन और एक लग्जरी कार शामिल थी। जब दोनों वाहनों की तलाशी ली गई तो पिकअप में घरेलू सामानों की आड़ में ड्रमों में भरा गया 320.72 किलोग्राम संदिग्ध केमिकल बरामद हुआ। जांच में सामने आया कि यह केमिकल 2-ब्रोमो-4-मिथाइल प्रोपेन है, जिसका इस्तेमाल सिंथेटिक ड्रग ‘एमडी’ बनाने में किया जाता है।
मौके से पुलिस ने तीन आरोपियों दीपक, जितेंद्र और शैलेंद्र को हिरासत में लिया। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि यह केमिकल झालावाड़ से मध्यप्रदेश भेजा जा रहा था और इसकी सप्लाई मुख्य सरगना जयनारायण उर्फ मामू और उसके साथी रामलाल को की जानी थी। इस खुलासे के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मध्यप्रदेश के आगर जिले में दबिश दी और दोनों आरोपियों जयनारायण उर्फ मामू और रामलाल को हिरासत में ले लिया। इस तरह इस पूरे नेटवर्क में शामिल कुल पांच आरोपियों को डिटेन किया गया।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ में यह भी सामने आया कि मध्यप्रदेश में एक स्थान पर अवैध रूप से एमडी बनाने की फैक्ट्री संचालित की जा रही थी। इसके बाद राजस्थान पुलिस की टीम ने मध्यप्रदेश पुलिस के सहयोग से सुसनेर क्षेत्र में दबिश दी। इस दौरान आरोपी रघुनंदन मौके से फरार हो गया। हालांकि, उसकी निशानदेही के आधार पर माचलपुर थाना पुलिस ने उसके घर पर छापेमारी की।
छापेमारी के दौरान पुलिस को नशीले पदार्थ बनाने से जुड़े कई उपकरण, केमिकल प्रोसेसिंग का सामान और एक अवैध फैक्ट्री के साक्ष्य मिले। इससे यह साफ हो गया कि यह कोई छोटा-मोटा गिरोह नहीं, बल्कि अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय एक संगठित ड्रग नेटवर्क है। माचलपुर पुलिस ने आरोपी रघुनंदन के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है और उसकी गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।
एसपी अमित कुमार ने बताया कि जब्त किए गए केमिकल और वाहनों की बाजार कीमत लाखों रुपये आंकी जा रही है। यदि यह केमिकल एमडी बनाने के लिए इस्तेमाल हो जाता, तो इससे बड़ी मात्रा में नशीला पदार्थ तैयार कर युवाओं तक पहुंचाया जा सकता था। समय रहते की गई इस कार्रवाई से न केवल नशे के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, बल्कि समाज को एक गंभीर खतरे से भी बचाया गया है।
पुलिस अधीक्षक ने यह भी स्पष्ट किया कि नशे के कारोबार में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। चाहे वह केमिकल सप्लायर हो, ट्रांसपोर्टर हो या फैक्ट्री संचालक—सभी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस मामले में आगे भी पूछताछ जारी है और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के नाम सामने आने की संभावना है।
इस कार्रवाई को नशे के खिलाफ लड़ाई में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। स्थानीय स्तर पर भी पुलिस की इस सख्त कार्रवाई की सराहना हो रही है। आमजन का कहना है कि इस तरह की कार्रवाइयों से युवाओं को नशे की गिरफ्त में जाने से रोका जा सकेगा। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है और आने वाले दिनों में और भी खुलासे होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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नरेगा बचाओ, पंचायत व नगरीय चुनाव तैयारियों और एसआईआर प्रक्रिया को लेकर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी खानपुर की अहम बैठक सम्पन्न

खानपुर।
ब्लॉक कांग्रेस कमेटी खानपुर की एक महत्वपूर्ण बैठक नरेगा बचाओ अभियान, पंचायत राज एवं नगरीय चुनावों की तैयारियों तथा एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया को लेकर आयोजित की गई। बैठक झालावाड़ रोड फव्वारा तिराहा स्थित एक निजी होटल में सम्पन्न हुई। बैठक की अगुवाई क्षेत्रीय विधायक सुरेश गुर्जर ने की, जबकि अध्यक्षता ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष बालचंद मीणा ने की।
बैठक में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारी, मंडल अध्यक्ष, युवा कांग्रेस, एनएसयूआई, महिला कांग्रेस, सेवादल, कांग्रेस बीएलए सहित सभी अग्रिम संगठनों के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी पंचायत राज और नगरीय चुनावों को लेकर संगठनात्मक मजबूती, नरेगा को बचाने के लिए जनआंदोलन की रणनीति तथा एसआईआर प्रक्रिया में संभावित अनियमितताओं पर सतर्कता बनाए रखने को लेकर कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करना रहा।
बैठक में निर्णय लिया गया कि नरेगा को कमजोर करने की कथित साजिशों के खिलाफ पंचायत मुख्यालयों पर जनचौपाल आयोजित की जाएंगी। इन जनचौपालों के माध्यम से भाजपा सरकार द्वारा रोजगार योजनाओं पर किए जा रहे कथित “मनोवैज्ञानिक प्रहार” को आमजन तक पहुंचाया जाएगा। वक्ताओं ने कहा कि नरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण गरीबों के जीवन और आजीविका का आधार है, और इसे खत्म करने या कमजोर करने का कोई भी प्रयास आमजन के खिलाफ है।
एसआईआर प्रक्रिया को लेकर भी बैठक में गंभीर चर्चा हुई। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सत्यापित मतदाताओं के नाम फर्जी आपत्तियों के जरिए मतदाता सूचियों से हटाने की साजिश की जा रही है। बैठक में कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए गए कि वे बीएलओ द्वारा सत्यापित मतदाताओं के नामों पर लगातार नजर रखें और यदि किसी प्रकार की अनियमितता या जबरन आपत्ति दर्ज होती है तो उसका तुरंत विरोध दर्ज करवाएं। इसके लिए मंडल और बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई।
बैठक को संबोधित करते हुए विधायक सुरेश गुर्जर ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की मंशा आमजन के प्रति ठीक नहीं है। सरकार नरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाकर और धार्मिक भावनाओं की आड़ लेकर इस योजना को धीरे-धीरे कमजोर करने का प्रयास कर रही है, ताकि ग्रामीणों के रोजगार पर “कैंची” चलाई जा सके। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया के माध्यम से चुनाव आयोग पर दबाव बनाकर और बीएलओ द्वारा सत्यापित मतदाताओं पर फर्जी आपत्तियां दर्ज करवा कर कांग्रेस विचारधारा से जुड़े सर्वसमाज के लोगों के नाम मतदाता सूचियों से हटवाने की कोशिश की जा रही है, जो लोकतांत्रिक और संवैधानिक प्रक्रियाओं का सीधा उल्लंघन है।
विधायक गुर्जर ने यह भी कहा कि भाजपा सरकार ने ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद और नगरीय वार्डों के परिसीमन में तय दूरी और भौगोलिक परिस्थितियों की अनदेखी कर मनमाफिक सीमाएं तय की हैं, जिससे आमजन को भारी असुविधा हो रही है। यह परिसीमन जनभावनाओं के विपरीत है और सरकार की जनविरोधी कार्यशैली को दर्शाता है।
उन्होंने कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए कहा कि कांग्रेस का हर पदाधिकारी और कार्यकर्ता “बब्बर शेर” है और वह इन असंवैधानिक प्रहारों का मुंहतोड़ जवाब देगा। जरूरत पड़ी तो सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष किया जाएगा। उन्होंने घोषणा की कि आगामी दिनों में प्रत्येक मंडल स्तर पर बैठकें आयोजित कर विस्तृत रोडमैप तैयार किया जाएगा।
बैठक को पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष भवानीशंकर गुर्जर, बलराम हाड़ा, पूर्व सरपंच ललित राठौर, मंडल अध्यक्ष प्रमोद सोनी, योगेंद्र सुमन, रामचन्द्र गुर्जर, सुरेंद्र मेहता, जिला परिषद सदस्य राकेश सोनी, सरपंच कमलेश मेहता, मदनलाल वर्मा, कन्हैयालाल मीणा, नगर अध्यक्ष शिवम गुप्ता, जनपद सदस्य अमरलाल जादम, ब्लॉक प्रवक्ता हनुमान रामावत, पूर्व उपसरपंच रिंकू गुर्जर, आमीर खान, वरिष्ठ नेता राजेन्द्र गुप्ता, पूर्व सरपंच भवानीशंकर बैरवा, महिला कांग्रेस नगर अध्यक्ष हेमलता यादव, ओबीसी कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष मांगीलाल सुमन, एससी प्रकोष्ठ ब्लॉक अध्यक्ष रामभरोस मेघवाल सहित कई नेताओं ने संबोधित किया।
इस अवसर पर युवा कांग्रेस विधानसभा अध्यक्ष शिवराज सिंह गुर्जर, पूर्व एनएसयूआई ब्लॉक अध्यक्ष महेंद्र यादव, पूर्व नगर अध्यक्ष भेरूलाल मेहरा, रामकिशन धनोलिया, मुफद्दल बोहरा, बद्रीलाल मीणा, मुकेश गुर्जर, कन्हैयालाल मेहता, धनराज मेवाड़ा, गरीबचंद मेघवाल, आकाश नागर, रामभरोस गुर्जर, सलीम खान सहित सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे। बैठक का संचालन ब्लॉक प्रवक्ता हनुमान रामावत ने किया।
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खुद बुलडोजर हो गए हैं, आओ भिड़ो” – शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के तीखे तेवर, सरकार से लेकर विपक्ष तक पर साधा निशाना

काशी। प्रयागराज माघ मेला से लौटकर काशी पहुंचे ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने एक बार फिर अपने बेबाक और आक्रामक तेवरों से सियासी और धार्मिक हलकों में हलचल मचा दी है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने गौ हत्या, माघ मेला विवाद, UGC के नए नियम, केंद्र सरकार, विपक्षी नेताओं और प्रदेश सरकार के रवैये पर खुलकर अपनी बात रखी। उनके बयान न सिर्फ तीखे थे, बल्कि सीधे टकराव की चेतावनी भी देते नजर आए।
गौ हत्या के मुद्दे पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बेहद सख्त लहजे में कहा, “अब हम खुद बुलडोजर हो गए हैं, आओ भिड़ो। जो भी गौ हत्यारा सामने आएगा, उसके ऊपर बुलडोजर चलेगा।” उन्होंने कहा कि गौ माता की रक्षा के लिए अब केवल बयान नहीं, बल्कि ठोस और निर्णायक कदम उठाने का समय आ गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गौ रक्षा कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि सनातन धर्म और हिंदू समाज की आत्मा से जुड़ा प्रश्न है।
माघ मेला विवाद को लेकर शंकराचार्य ने प्रशासन और सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में न तो किसी पुलिसकर्मी पर कार्रवाई हुई, न ही किसी तरह की निष्पक्ष जांच कराई गई और न ही उन्हें न्याय मिला। “सब अपनी-अपनी गलती छिपाने में लगे हैं, कोई भी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है,” उन्होंने कहा। शंकराचार्य ने दो टूक कहा कि उनकी आवाज को दबाया नहीं जा सकता और वह आगे की रणनीति बनाकर आंदोलन को और तेज करेंगे।
UGC के नए नियमों पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि एक ही समाज को अलग-अलग जातियों और वर्गों में बांटकर आपस में लड़ाने का प्रयास किया जा रहा है। “जब समाज आपस में ही उलझा रहेगा, तो सनातन धर्म की मूल एकता टूटेगी और उसका सीधा फायदा धर्म विरोधी ताकतों को मिलेगा,” उन्होंने चेतावनी दी। शंकराचार्य ने कहा कि शिक्षा नीति के नाम पर ऐसी व्यवस्थाएं लागू की जा रही हैं, जो आने वाली पीढ़ियों को अपनी परंपरा और संस्कृति से दूर कर देंगी।
गृह मंत्री अमित शाह के हालिया बयान पर पलटवार करते हुए शंकराचार्य ने बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि “सरकार मंचों से अच्छी-अच्छी बातें कर रही है, लेकिन ज़मीन पर हालात बिल्कुल अलग हैं। ऐसा लगता है कि सरकार अपने ही डेथ वारंट पर साइन कर रही है।” उन्होंने कहा कि यदि जनता की आस्था और धार्मिक भावनाओं को लगातार नजरअंदाज किया गया, तो इसका राजनीतिक खामियाजा भी भुगतना पड़ेगा।
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा प्रयागराज की घटना को “अनिष्टकारी” बताए जाने पर भी शंकराचार्य ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि शास्त्रों के अनुसार यज्ञ की पूर्णाहुति शंकराचार्य के स्नान से मानी जाती है, जो इस बार नहीं हो सकी। “इसी कारण अनिष्ट हुआ। इसे अखिलेश यादव भी समझते हैं, तभी उन्होंने ऐसा बयान दिया,” शंकराचार्य ने कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई व्यक्तिगत विषय नहीं, बल्कि धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा प्रश्न है।
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य द्वारा दूरी बनाए जाने के सवाल पर शंकराचार्य ने तंज कसते हुए कहा कि सरकार का हिस्सा होने के नाते उन्हें साहस दिखाना चाहिए था। “भेजे जाने पर आने जैसी बात विवेकहीनता को दर्शाती है,” उन्होंने कहा। शंकराचार्य ने संकेत दिए कि सत्ता में रहते हुए भी यदि कोई धर्म और समाज के सवालों पर चुप रहता है, तो वह अपने कर्तव्य से विमुख होता है।
रायबरेली में लगे विवादित पोस्टरों पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि “ये वही लोग हैं जो गौ हत्या के पैसों से अपनी राजनीति चमकाते हैं।” उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप कभी सिद्ध नहीं हो पाएंगे। “जो लोग आरोप लगा रहे हैं, उन्हें पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए,” उन्होंने कहा।
भविष्य की रणनीति को लेकर शंकराचार्य ने बड़ा संकेत देते हुए कहा कि चारों शंकराचार्यों के समर्थन से गौ रक्षा को प्राथमिक मुद्दा बनाकर एक व्यापक आंदोलन चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सड़क से लेकर समाज के हर स्तर पर जागरूकता और दबाव बनाया जाएगा। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने साफ किया कि चाहे सरकार हो या विपक्ष, जो भी गौ माता और सनातन धर्म के खिलाफ खड़ा होगा, उसका खुलकर विरोध किया जाएगा।
कुल मिलाकर, काशी पहुंचते ही शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के तीखे तेवर यह संकेत दे रहे हैं कि आने वाले दिनों में धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक मोर्चे पर टकराव और तेज हो सकता है। उनके बयान न सिर्फ सरकार के लिए चुनौती हैं, बल्कि विपक्ष के लिए भी असहज स्थिति पैदा करने वाले माने जा रहे हैं।
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झालरापाटन पुलिस की अवैध शराब तस्करी के खिलाफ ऐतिहासिक कार्रवाई, एक करोड़ से अधिक की शराब व ट्रक जब्त, एक आरोपी गिरफ्तार

झालावाड़ जिले में अवैध शराब तस्करी के खिलाफ पुलिस ने अब तक की बड़ी और प्रभावी कार्रवाई को अंजाम दिया है। थाना झालरापाटन पुलिस ने दिनांक 24 जनवरी 2026 को नाकाबंदी के दौरान एक ट्रक से पंजाब निर्मित अवैध अंग्रेजी शराब व बीयर के कुल 783 कार्टून जब्त किए हैं। इन कार्टूनों में कुल 13,500 से अधिक बोतलें और बीयर केन शामिल हैं। जब्त की गई अवैध शराब की अनुमानित कीमत एक करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। पुलिस ने मौके से ट्रक चालक को गिरफ्तार कर ट्रक को भी जब्त कर लिया है।
जिला पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने प्रेस को जानकारी देते हुए बताया कि गुजरात राज्य में शराब बिक्री पर प्रतिबंध होने के कारण शराब तस्कर पंजाब में निर्मित शराब को बड़े ट्रकों के माध्यम से चोरी-छिपे गुजरात पहुंचाने का प्रयास करते हैं। तस्कर अलग-अलग मार्गों और जिलों से होकर शराब की तस्करी करते हैं, ताकि पुलिस की नजर से बचा जा सके। झालावाड़ जिला राजस्थान–मध्यप्रदेश–गुजरात मार्ग से जुड़ा होने के कारण तस्करों द्वारा इसे ट्रांजिट रूट के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

पुलिस अधीक्षक ने बताया कि जिले में अवैध गतिविधियों, संगठित अपराध, जुआ-सट्टा, मादक पदार्थ एवं अवैध शराब तस्करी के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत जिले के समस्त थानाधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि अवैध कारोबार में संलिप्त व्यक्तियों के खिलाफ प्रभावी और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
इसी क्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक झालावाड़ भागचंद मीणा के निर्देशन में एवं पुलिस उप अधीक्षक वृत झालावाड़ हर्षराज सिंह खरेड़ा के सुपरविजन में थाना झालरापाटन पुलिस को यह सफलता मिली। थाना प्रभारी अल्का, पुलिस निरीक्षक, को विश्वसनीय मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई कि एक ट्रक में भारी मात्रा में पंजाब निर्मित अवैध शराब भरकर झालावाड़ होते हुए गुजरात की ओर ले जाई जा रही है।
सूचना को गंभीरता से लेते हुए थाना प्रभारी के नेतृत्व में उप निरीक्षक श्री सुनील कुमार मय जाप्ता तुरंत सक्रिय हुए और माधोपुर ब्रिज के नीचे झालरापाटन क्षेत्र में नाकाबंदी की गई। नाकाबंदी के दौरान संदिग्ध ट्रक को रोका गया। पुलिस द्वारा ट्रक की तलाशी लेने पर उसमें अवैध रूप से परिवहन की जा रही पंजाब निर्मित अंग्रेजी शराब एवं बीयर के 783 कार्टून बरामद हुए। प्रत्येक कार्टून में शराब की बोतलें एवं बीयर केन भरे हुए थे, जिनकी कुल संख्या करीब 13,500 पाई गई।

पुलिस ने मौके से ट्रक चालक सज्जन सिंह पिता सुरजभान सिंह राजपूत, उम्र 26 वर्ष, निवासी सालवाकला, असारानाडा, थाना डांगियावास, जिला जोधपुर को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के पास से शराब परिवहन से संबंधित कोई वैध दस्तावेज या परमिट नहीं पाया गया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जब्त की गई अवैध शराब और ट्रक की कुल कीमत एक करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह शराब पंजाब से भरकर लाई गई थी और इसे गुजरात के राजकोट सहित अन्य क्षेत्रों में खपाने की योजना थी। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस तस्करी के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं, शराब किसके लिए ले जाई जा रही थी और इसके नेटवर्क में कौन से बड़े तस्कर सक्रिय हैं।

इस पूरी कार्रवाई में थाना झालरापाटन की विशेष टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। टीम में थाना प्रभारी अल्का, उप निरीक्षक सुनील वर्मा, हेड कांस्टेबल प्रीतम सिंह, कांस्टेबल सीताराम, किशोर कुमार, प्रवीण कुमार, मुकेश जांगिड़, करण सिंह तथा आसूचना अधिकारी शामिल रहे। टीम की सतर्कता, त्वरित निर्णय और समन्वित कार्रवाई के कारण तस्करी का यह बड़ा प्रयास विफल हो सका।
जिला पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने पुलिस टीम की सराहना करते हुए कहा कि अवैध शराब तस्करी न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि समाज के लिए भी गंभीर खतरा है। पुलिस का उद्देश्य ऐसे अवैध धंधों पर पूरी तरह अंकुश लगाना है। आने वाले दिनों में भी जिलेभर में सघन नाकाबंदी, गश्त और आसूचना तंत्र को और मजबूत किया जाएगा।
पुलिस ने आमजन से भी अपील की है कि यदि कहीं अवैध शराब, मादक पदार्थ या किसी भी प्रकार की गैरकानूनी गतिविधि की जानकारी मिले तो तुरंत पुलिस को सूचित करें। सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान गोपनीय रखी जाएगी। झालावाड़ पुलिस की इस कार्रवाई से शराब तस्करों में हड़कंप मचा हुआ है और इसे जिले में अवैध कारोबार के खिलाफ एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
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मादक पदार्थ तस्करी के विरुद्ध मिश्रोली थाना पुलिस की बड़ी कार्रवाई

झालावाड़।
जिले में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पुलिस थाना मिश्रोली ने बड़ी सफलता हासिल की है। मिश्रोली थाना पुलिस ने एक सुनियोजित कार्रवाई को अंजाम देते हुए 96 किलो 300 ग्राम अवैध अफीम डोडा चूरा जब्त किया है। इसके साथ ही तस्करी में प्रयुक्त दो कार, एक ट्रैक्टर, एक पिस्टल मय दो जिंदा कारतूस, इलेक्ट्रॉनिक कांटा तथा कट्टों की सिलाई मशीन भी जब्त की गई है। इस कार्रवाई से क्षेत्र में मादक पदार्थ तस्करों में हड़कंप मच गया है।
जिला पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने बताया कि अवैध मादक पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए जिलेभर में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत सभी थानाधिकारियों को अपने-अपने थाना क्षेत्रों में सक्रिय होकर तस्करों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। मिश्रोली थाना पुलिस द्वारा की गई यह कार्रवाई अभियान की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
ऐसे हुआ खुलासा
थानाधिकारी मिश्रोली उपनिरीक्षक सुरेन्द्र सिंह को 21 जनवरी 2026 को मुखबिर से सूचना मिली कि थाना क्षेत्र के ग्राम छान का खेड़ा में गोरधन सिंह के खेत पर अवैध मादक पदार्थ डोडा चूरा संग्रहित किया गया है तथा उसे विभिन्न वाहनों के माध्यम से परिवहन किया जाने वाला है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए तत्काल पुलिस टीम का गठन किया गया और मौके पर दबिश दी गई।
पुलिस टीम जब खेत और कुएं के पास पहुंची तो वहां भारी मात्रा में पिसा हुआ एवं बिना पिसा हुआ अफीम डोडा चूरा मिला। मौके से इलेक्ट्रॉनिक कांटा और कट्टों की सिलाई करने की मशीन भी बरामद की गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि तस्कर मौके पर ही डोडा चूरा को तौलकर पैकिंग करते थे। पुलिस ने मौके से एक कार मैग्नाइट (रजिस्ट्रेशन नंबर RJ19CP5899), एक बिना नंबर की हुंडई ऑरा कार तथा एक बिना नंबर का फार्म ट्रैक्टर भी जब्त किया।
फर्जी नंबर प्लेटों का जाल
जांच के दौरान पुलिस को चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जब्त की गई कारों में अलग-अलग नंबर प्लेटें रखी हुई थीं, जिनका उपयोग तस्करी के दौरान पहचान छुपाने के लिए किया जाता था। मैग्नाइट कार से तीन अतिरिक्त नंबर प्लेटें तथा हुंडई ऑरा कार से चार अलग-अलग नंबर प्लेटें बरामद की गईं। इससे यह स्पष्ट हो गया कि तस्करी एक संगठित गिरोह द्वारा की जा रही थी।
हथियारों की बरामदगी ने बढ़ाई गंभीरता
पुलिस ने मौके से एक पिस्टल और दो जिंदा कारतूस भी जब्त किए हैं। हथियारों की मौजूदगी से यह आशंका और गहरी हो गई है कि तस्कर किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी के साथ थे। पुलिस का मानना है कि यह गिरोह लंबे समय से अवैध मादक पदार्थों के कारोबार में सक्रिय रहा है।
आरोपी फरार, तलाश जारी
इस मामले में मुख्य आरोपी गोरधन सिंह और शम्भु सिंह घटना के समय मौके से फरार हो गए। पुलिस ने दोनों आरोपियों की तलाश के लिए अलग-अलग टीमों का गठन कर दिया है। संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार किए जाने की उम्मीद जताई जा रही है।
वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में कार्रवाई
यह संपूर्ण कार्रवाई जिला पुलिस अधीक्षक अमित कुमार एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भागचंद मीणा के निर्देशन में तथा वृताधिकारी भवानीमंडी प्रेमकुमार के निकटतम सुपरविजन में संपन्न हुई। थानाधिकारी सुरेन्द्र सिंह के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने सतर्कता और तत्परता का परिचय देते हुए इस बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया।
पुलिस टीम की सराहनीय भूमिका
इस कार्रवाई में थानाधिकारी सुरेन्द्र सिंह, सहायक उपनिरीक्षक भगवान लाल, कांस्टेबल घनश्याम, बलराम, सूरज, सचिन एवं रामनिवास की विशेष भूमिका रही। पुलिस अधीक्षक ने टीम की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे ही समर्पित प्रयासों से जिले को नशा मुक्त बनाया जा सकेगा।
जिले में जारी रहेगा अभियान
पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मादक पदार्थों के खिलाफ यह अभियान आगे भी पूरी सख्ती के साथ जारी रहेगा। अवैध कारोबार में लिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। आमजन से भी अपील की गई है कि यदि उन्हें मादक पदार्थों से जुड़े किसी भी प्रकार की सूचना मिले तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।
मिश्रोली थाना पुलिस की इस बड़ी कार्रवाई से यह संदेश साफ है कि झालावाड़ पुलिस नशे के कारोबार को जड़ से खत्म करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और आने वाले दिनों में ऐसे मामलों में और भी कठोर कदम उठाए जाएंगे।
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संगठित अपराध पर कड़ा प्रहार: BNS की धारा 112 में सट्टा गिरोह पर कार्रवाई

झालरापाटन (झालावाड़)।
जिले में अवैध जुआ-सट्टा और संगठित अपराध के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत झालरापाटन पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई कानूनी और सामाजिक दोनों दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस मामले में पुलिस ने पहली बार सट्टा जैसे अपराध को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 112 के अंतर्गत संगठित अपराध मानते हुए सख्त कार्रवाई की है, जो भविष्य में ऐसे अपराधियों के लिए एक कड़ा संदेश है।
जिला पुलिस अधीक्षक अमित कुमार के निर्देशानुसार 20 जनवरी को थाना झालरापाटन पुलिस ने पशुपतिनाथ मंदिर के पीछे दबिश देकर सट्टा खाईवाली करते हुए तीन आरोपियों—हरिशंकर, चेतन एवं नरेन्द्र कुमार—को रंगे हाथों गिरफ्तार किया। आरोपियों के कब्जे से ₹6000 नकद सट्टा राशि, 3 कैलकुलेटर, 10 मोबाइल फोन तथा सट्टे का विस्तृत हिसाब बरामद किया गया।
इस कार्रवाई का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि गिरफ्तार अभियुक्तों में से दो—हरिशंकर और नरेन्द्र कुमार—का पूर्व से आपराधिक इतिहास रहा है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार हरिशंकर के विरुद्ध पूर्व में हत्या के प्रयास (धारा 307) सहित राजस्थान जुआ अध्यादेश के करीब 11 प्रकरण दर्ज हैं। वहीं नरेन्द्र कुमार भी पूर्व में कई बार सट्टा अधिनियम के तहत पकड़ा जा चुका है। इसके बावजूद दोनों आरोपी लगातार संगठित रूप से सट्टा गतिविधियों को संचालित कर रहे थे।
पुलिस जांच में सामने आया कि यह गिरोह अलग-अलग मोहल्लों से आकर एक संगठित इकाई के रूप में काम करता था। गिरोह का नेटवर्क इतना मजबूत था कि कुछ लोग मौके पर नकद राशि लगाते थे, जबकि कई लोग मोबाइल फोन के माध्यम से ऑनलाइन सट्टा लगवाकर डिजिटल भुगतान करते थे। असनावर निवासी चेतन इस पूरे नेटवर्क में प्रमुख सहयोगी की भूमिका निभा रहा था, जो अलग-अलग क्षेत्रों से सट्टा लगाने वालों को जोड़ने का काम करता था।
यह पूरी कार्रवाई अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भागचन्द मीणा के निर्देशन एवं पुलिस उप अधीक्षक हर्षराज सिंह खरेडा के सुपरविजन में की गई। थाना झालरापाटन की थानाधिकारी अल्का के नेतृत्व में गठित टीम ने योजनाबद्ध तरीके से दबिश देकर इस संगठित गिरोह को धर दबोचा।
इस ऑपरेशन में उप निरीक्षक सुनील कुमार, हेड कांस्टेबल प्रीतम सिंह, सीताराम, कांस्टेबल पवन कुमार, मुकेश कुमार, विजय सिंह, महिला कांस्टेबल धन्नी तथा चालक प्रवीण कुमार की सराहनीय भूमिका रही। इसके अलावा इस पूरे मामले में आसूचना अधिकारी करण सिंह की विशेष भूमिका मानी जा रही है, जिनकी सटीक और समय पर दी गई जानकारी के आधार पर पुलिस इस संगठित गिरोह तक पहुंचने में सफल रही।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि धार्मिक स्थलों के आसपास इस प्रकार की अवैध गतिविधियां न केवल कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि सामाजिक और धार्मिक भावनाओं को भी ठेस पहुंचाती हैं। इस कार्रवाई ने स्पष्ट कर दिया है कि धार्मिक स्थलों की पवित्रता बिगाड़ने वाले और समाज में अपराध का जहर घोलने वाले संगठित गिरोहों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
झालावाड़ जिला पुलिस ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में जुआ-सट्टा, मादक पदार्थ तस्करी और अन्य संगठित अपराधों के खिलाफ इसी तरह सख्त कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि जिले में कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जा सके।