
झालावाड़ की बेटी अंतिमा कुमारी को कोटा में आयोजित आइकॉन अवॉर्ड समारोह में सम्मानित किया गया। यह सम्मान प्रसिद्ध टीवी अभिनेत्री कांची सिंह ने मंच पर प्रदान किया। कांची सिंह लोकप्रिय धारावाहिक ससुराल सिमर का, और प्यार हो गया और यह रिश्ता क्या कहलाता है में अपने अभिनय के लिए जानी जाती हैं। समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया, जिसमें अंतिमा कुमारी की उपलब्धियों ने विशेष रूप से सभी का ध्यान आकर्षित किया। मंच पर जैसे ही उनका नाम पुकारा गया, उपस्थित लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका स्वागत किया।
अंतिमा कुमारी मूल रूप से झालावाड़ जिले की रहने वाली हैं और उन्होंने शिक्षा, कला तथा सामाजिक गतिविधियों के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने जीएनएम के साथ-साथ लॉ और एलएलबी की पढ़ाई पूरी की है। शिक्षा के प्रति उनके समर्पण ने उन्हें न केवल अकादमिक क्षेत्र में मजबूत बनाया, बल्कि सामाजिक विषयों को समझने और समाज के बीच सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर भी दिया। पढ़ाई के साथ उन्होंने अभिनय क्षेत्र में भी कदम रखा और लगातार मेहनत के बल पर अपनी प्रतिभा को निखारा।

अभिनय के क्षेत्र में अंतिमा कुमारी ने कई मंचीय प्रस्तुतियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लिया। इसके अलावा उन्होंने दूरदर्शन पर प्रसारित धारावाहिक “अवंतिका” में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस धारावाहिक में उनके अभिनय को दर्शकों ने सराहा और उन्हें एक उभरती कलाकार के रूप में पहचान मिली। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से यह मुकाम हासिल किया। अभिनय के साथ-साथ उन्होंने सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता फैलाने के कार्यक्रमों में भी भागीदारी निभाई, जिससे उनकी पहचान एक जागरूक और सक्रिय युवती के रूप में बनी।

कोटा में आयोजित आइकॉन अवॉर्ड समारोह में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए प्रतिभागियों को उनके कार्यों के आधार पर सम्मानित किया गया। इस दौरान अंतिमा कुमारी को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों, कला प्रतिभा और सामाजिक सक्रियता को देखते हुए आइकॉन अवॉर्ड प्रदान किया गया। कार्यक्रम के दौरान कांची सिंह ने कहा कि छोटे शहरों से आने वाली प्रतिभाएं मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर बड़े मंच तक पहुंच रही हैं, जो प्रेरणादायक है। उन्होंने अंतिमा कुमारी को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं और निरंतर आगे बढ़ते रहने का संदेश दिया।

अंतिमा कुमारी ने सम्मान प्राप्त करने के बाद आयोजकों, परिवार और समर्थकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उनके लिए प्रेरणा का स्रोत है और आगे भी वे शिक्षा और अभिनय दोनों क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन करने का प्रयास करेंगी। उन्होंने युवाओं से भी अपील की कि वे अपनी रुचि के अनुसार मेहनत करें और अवसर मिलने पर पीछे न हटें।
सम्मान मिलने की खबर जैसे ही झालावाड़ पहुंची, परिजनों और क्षेत्रवासियों में खुशी की लहर दौड़ गई। लोगों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी जताई और अंतिमा कुमारी को बधाइयां दीं। स्थानीय लोगों ने इसे जिले के लिए गर्व का क्षण बताया और कहा कि उनकी सफलता से अन्य युवाओं को भी प्रेरणा मिलेगी। सामाजिक संगठनों और परिचितों ने भी उन्हें शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनकी उपलब्धि से जिले का नाम रोशन हुआ है।

अंतिमा कुमारी की इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी बड़े शहर की मोहताज नहीं होती। दृढ़ संकल्प, मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर कोई भी युवा अपनी मंजिल हासिल कर सकता है। शिक्षा, अभिनय और सामाजिक सक्रियता—तीनों क्षेत्रों में संतुलन बनाते हुए उन्होंने जो मुकाम हासिल किया है, वह निश्चित रूप से प्रेरणादायक है। लोगों को उम्मीद है कि आने वाले समय में अंतिमा कुमारी और भी बड़े मंचों पर जिले और प्रदेश का नाम रोशन करेंगी।