आवारा कुत्तों ने नोचा मासूम को, दो साल की बच्ची की दर्दनाक मौत

झालावाड़ शहर में शुक्रवार सुबह एक ऐसी दर्दनाक घटना सामने आई, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। शहर के भाटिया वर्कशॉप क्षेत्र में आवारा कुत्तों के झुंड ने दो साल की मासूम बच्ची पर हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोग प्रशासन और नगर परिषद की लापरवाही पर सवाल उठा रहे हैं।https://www.facebook.com/share/v/18AMNzYE1o/

जानकारी के अनुसार मृतक बच्ची की पहचान गोरी के रूप में हुई है। गोरी अपने पिता राजू लाल के साथ भाटिया वर्कशॉप के पास बने एक अस्थायी टेंट में रह रही थी। शुक्रवार सुबह करीब 6 बजे बच्ची अपने पिता के साथ टेंट के बाहर सो रही थी। इसी दौरान सात से आठ आवारा कुत्ते वहां पहुंचे और बच्ची को उठाकर करीब 50 मीटर दूर ले गए।

बच्ची की चीख सुनकर पिता राजू लाल की नींद खुली। उन्होंने तुरंत कुत्तों का पीछा किया और मदद के लिए शोर मचाया। जब तक वह मौके पर पहुंचे, तब तक कुत्ते बच्ची को बुरी तरह नोच चुके थे। राजू लाल ने किसी तरह कुत्तों को भगाया और गंभीर हालत में बच्ची को गोद में उठाकर तुरंत एसआरजी अस्पताल पहुंचे।

अस्पताल में चिकित्सकों ने बच्ची का परीक्षण किया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। अस्पताल सूत्रों के अनुसार बच्ची के पेट, माथे, हाथ-पैर और शरीर के कई हिस्सों पर 30 से 40 गंभीर घाव पाए गए। अत्यधिक खून बहने और गहरे जख्मों के कारण बच्ची की जान नहीं बच सकी।

घटना के बाद अस्पताल परिसर में परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। मासूम की मौत की खबर सुनते ही इलाके के लोग भी बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंच गए। हर किसी की आंखें नम थीं और लोग इस दर्दनाक हादसे को लेकर स्तब्ध नजर आए।

परिजनों ने बताया कि राजू लाल मूल रूप से बारा जिले के भंवरगढ़ क्षेत्र के रहने वाले हैं। वह करीब डेढ़ महीने पहले काम की तलाश में झालावाड़ आए थे। परिवार भाटिया वर्कशॉप के पास टेंट लगाकर रह रहा था। राजू लाल शादी-ब्याह और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों में ढोल बजाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण परिवार अस्थायी टेंट में रहने को मजबूर था।

स्थानीय लोगों का कहना है कि भाटिया वर्कशॉप और आसपास के इलाके में लंबे समय से आवारा कुत्तों का आतंक बना हुआ है। क्षेत्र में दो दर्जन से अधिक कुत्ते झुंड बनाकर घूमते रहते हैं। सुबह और रात के समय राहगीरों तथा बच्चों पर हमला करने की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। लोगों ने कई बार नगर परिषद और प्रशासन से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

इलाके के निवासियों का कहना है कि यदि समय रहते आवारा कुत्तों को पकड़ने और नियंत्रण की कार्रवाई की जाती तो शायद मासूम गोरी की जान बच सकती थी। घटना के बाद लोगों में प्रशासन के खिलाफ भारी नाराजगी देखी जा रही है। कई लोगों ने आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने की मांग की है।

गौरतलब है कि राजस्थान में हाल के समय में आवारा कुत्तों के हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। छोटे बच्चों और बुजुर्गों पर हमलों की खबरें चिंता का विषय बन चुकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि शहरों में बढ़ती गंदगी, खुले में फेंका जाने वाला कचरा और समय पर नसबंदी व नियंत्रण अभियान नहीं चलने से आवारा कुत्तों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

इस घटना ने एक बार फिर नगर निकायों की व्यवस्थाओं और आवारा पशुओं को लेकर प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा हो सकती हैं।

फिलहाल पुलिस और प्रशासन ने मामले की जानकारी लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है। वहीं मासूम गोरी की दर्दनाक मौत ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

बरगी डैम क्रूज हादसा: मौत के आगोश में भी बेटे को सीने से लगाए रही मां, रेस्क्यू टीम की आंखें हुई नम

मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित बरगी डैम में हुए भीषण क्रूज हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है, लेकिन इस त्रासदी के बीच सामने आया एक दृश्य ऐसा था जिसने पत्थर दिल लोगों की आंखें भी नम कर दीं। रेस्क्यू टीम जब डूबे हुए क्रूज के भीतर फंसे यात्रियों की तलाश कर रही थी, तभी मलबे में एक महिला का शव मिला। उसे बाहर निकालने में गोताखोरों को काफी मशक्कत करनी पड़ी, क्योंकि महिला अपने मासूम बेटे को सीने से इतनी मजबूती से लगाए हुए थी कि दोनों को अलग करना बेहद कठिन हो गया। बचाव दल ने बताया कि मां ने अंतिम सांस तक अपने करीब चार साल के बेटे को बाहों में समेटे रखा, मानो मौत से भी उसे बचा लेने की आखिरी कोशिश कर रही हो। इस हृदयविदारक दृश्य ने रेस्क्यू में लगे जवानों तक को अंदर तक झकझोर दिया। �

 

बताया जा रहा है कि बरगी डैम में मध्य प्रदेश टूरिज्म का क्रूज अचानक तेज आंधी और खराब मौसम की चपेट में आकर पलट गया। क्रूज में करीब 30 से अधिक लोग सवार थे। हादसे के बाद पानी में चीख-पुकार मच गई, लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर तैरने लगे, लेकिन कई यात्री क्रूज के अंदर ही फंस गए। इन्हीं में वह मां और उसका बेटा भी शामिल थे। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि जब नाव डूबने लगी तो मां ने अपने बेटे को सीने से कस लिया और शायद उसे पानी से बचाने के लिए अपने शरीर को ढाल बना लिया। गोताखोरों ने बताया कि जब वे क्रूज के भीतर पहुंचे तो बेहद कम जगह, लोहे की टूटी रॉड और गंदले पानी के बीच महिला और बच्चे के शव एक-दूसरे से चिपके मिले। यह दृश्य देखकर कुछ देर के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन तक थम गया। �

 

मौके पर मौजूद अधिकारी, पुलिसकर्मी और स्थानीय लोग यह दृश्य देखकर फफक पड़े। कैबिनेट मंत्री राकेश सिंह भी जब इस घटना की जानकारी और रेस्क्यू टीम का बयान सुन रहे थे तो उनकी आंखें भर आईं। वहां मौजूद हर शख्स के मुंह से बस एक ही बात निकली—मां आखिर मां होती है। मौत सामने खड़ी हो, सांसें थम रही हों, फिर भी उसकी पहली और आखिरी चिंता अपने बच्चे की जान होती है। यही कारण है कि यह दृश्य पूरे हादसे की सबसे दर्दनाक तस्वीर बन गया। हालांकि प्रशासन ने साफ किया है कि सोशल मीडिया पर वायरल कुछ तस्वीरें AI generated या असंबंधित हैं, लेकिन मां-बेटे के शव एक साथ मिलने की घटना आधिकारिक तौर पर रेस्क्यू टीम ने पुष्टि की है। �

 

इस हादसे में अब तक 9 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है जबकि कई लोग घायल हुए हैं। बचकर निकले यात्रियों ने क्रूज प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। कई यात्रियों का कहना है कि समय रहते लाइफ जैकेट नहीं दी गई, मौसम खराब होने के बावजूद क्रूज को बीच पानी में ले जाया गया और जब नाव डूबने लगी तो स्टाफ घबरा गया। स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर भी सुरक्षा इंतजामों को लेकर भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोग इसे केवल प्राकृतिक हादसा नहीं बल्कि प्रबंधन की घोर लापरवाही बता रहे हैं।

 

बरगी डैम की यह घटना भले ही एक दुर्घटना हो, लेकिन मां और बेटे का यह अंतिम आलिंगन हमेशा याद दिलाता रहेगा कि दुनिया की सबसे बड़ी ताकत ममता होती है। एक मां ने डूबते क्रूज, गहराते पानी और मौत के साये के बीच भी अपने बच्चे का हाथ नहीं छोड़ा। उसने आखिरी सांस तक अपने लाल को सीने से लगाए रखा। यह दृश्य सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि ऐसा जख्म है जिसे सुनकर हर मां का दिल कांप उठेगा और हर इंसान की आंखें नम हो जाएंगी। मौत दोनों की सांसें छीन सकी, लेकिन मां की ममता को जुदा नहीं कर सकी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने झालावाड़ को दी पर्यटन क्षेत्र में दो नई सौगातें “गागरोन दुर्ग गैलरी” एवं “गढ़ पैलेस सेल्फी पॉइंट” का भव्य उद्घाटन

 

https://www.facebook.com/share/v/1DTtyNVcGd/

झालावाड़, 09 अप्रैल। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने गुरुवार को झालावाड़ जिले के पर्यटन विकास को नई दिशा देते हुए दो महत्वपूर्ण सौगातें दीं। उन्होंने ऐतिहासिक गढ़ पैलेस स्थित राजकीय संग्रहालय में विकसित “गागरोन दुर्ग गैलरी” का फीता काटकर उद्घाटन किया तथा गढ़ पैलेस के सामने बनाए गए आकर्षक “सेल्फी पॉइंट” का विधिवत पट्टिका अनावरण कर लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने सेल्फी पॉइंट पर बैठकर तस्वीर भी खिंचवाई और गैलरी का विस्तार से अवलोकन करते हुए व्यवस्थाओं की सराहना की।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि झालावाड़ ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक दृष्टि से समृद्ध जिला है, जिसे पर्यटन मानचित्र पर और अधिक मजबूती से स्थापित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि “गागरोन दुर्ग गैलरी” जैसे नवाचार स्थानीय विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि पर्यटन सुविधाओं का विस्तार किया जाए और स्थानीय इतिहास व संस्कृति को आधुनिक माध्यमों से प्रस्तुत किया जाए, ताकि नई पीढ़ी भी अपनी जड़ों से जुड़ सके।

 

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन के विकास से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है, छोटे व्यापारियों को रोजगार के अवसर मिलते हैं और क्षेत्र की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित होती है। उन्होंने आमजन से भी अपील की कि वे अपने ऐतिहासिक स्थलों की स्वच्छता बनाए रखें तथा धरोहरों के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाएं।

 

https://www.facebook.com/share/v/1DTtyNVcGd/

गागरोन दुर्ग गैलरी: इतिहास का जीवंत दस्तावेज

जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ ने जानकारी देते हुए बताया कि जिला प्रशासन की अभिनव पहल पर राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी पंच गौरव योजना के अंतर्गत राजकीय संग्रहालय में “गागरोन दुर्ग गैलरी” का विकास किया गया है। गैलरी को आधुनिक तकनीक और आकर्षक प्रस्तुतीकरण के साथ तैयार किया गया है, जिससे पर्यटक गागरोन दुर्ग के इतिहास और स्थापत्य को नजदीक से समझ सकें।

गैलरी में गागरोन दुर्ग के प्रमुख स्थलों जैसे गणेश पोल, संत मिट्ठेशाह की दरगाह, नक्कारखाने का द्वार, लाल दरवाजा, जौहर कुंड, रानियों का महल (दरी खाना), द्वारकाधीश मंदिर, भैरवपोल, कटार देव की छतरी, अचलदास खींची का खांडा, जल संचयन संरचनाएं, मधुसूदन मंदिर, खींची राजाओं का महल, कृष्ण द्वार, राम बुर्ज, अंधेरी बावड़ी तथा गणगौर घाट के सजीव चित्र प्रदर्शित किए गए हैं। इन चित्रों के साथ प्रत्येक स्थल का संक्षिप्त इतिहास और महत्व भी दर्शाया गया है, जिससे दर्शकों को किले के प्रत्येक भाग की जानकारी एक ही स्थान पर मिल सके।

इसके अलावा गैलरी में भारतीय डाक विभाग द्वारा जारी गागरोन दुर्ग पर आधारित डाक टिकट भी प्रदर्शित किए गए हैं, जो इस दुर्ग की राष्ट्रीय पहचान को दर्शाते हैं। गैलरी में “राय तोते” की विशेष झलकियाँ भी शामिल की गई हैं, जो गागरोन दुर्ग की लोककथाओं और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते हैं। इसके साथ ही राज्य सरकार की पंच गौरव योजना के अंतर्गत आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता के चयनित चित्र भी प्रदर्शित किए गए हैं, जिनमें स्थानीय कलाकारों ने गागरोन दुर्ग को विभिन्न कलात्मक रूपों में प्रस्तुत किया है।

गैलरी में “वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स” में दर्ज प्रमाण पत्र की प्रतिलिपि भी लगाई गई है, जो गागरोन दुर्ग से जुड़े गौरव को दर्शाती है। गैलरी का मुख्य आकर्षण बीचों-बीच स्थापित गागरोन दुर्ग का भव्य त्रि-आयामी मॉडल है। यह मॉडल पर्यटकों को ऐसा अनुभव देता है मानो वे स्वयं दुर्ग के भीतर मौजूद हों। मॉडल के माध्यम से किले की संरचना, जल से घिरा स्थान, मुख्य द्वार और प्रमुख स्थलों की स्थिति स्पष्ट रूप से समझाई गई है।

गढ़ पैलेस सेल्फी पॉइंट बना आकर्षण का केंद्र

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने गढ़ पैलेस के सामने विकसित सेल्फी पॉइंट का भी उद्घाटन किया। यह सेल्फी पॉइंट विश्व प्रसिद्ध ताजमहल के सामने बनी बेंच की तर्ज पर तैयार किया गया है। यहां बैठकर पर्यटक गढ़ पैलेस की सुंदर पृष्ठभूमि के साथ यादगार तस्वीरें ले सकेंगे। उद्घाटन के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री ने स्वयं भी यहां बैठकर फोटो खिंचवाई।

जिला कलेक्टर ने बताया कि इस सेल्फी पॉइंट का उद्देश्य पर्यटन को बढ़ावा देना और शहर में आकर्षक फोटो लोकेशन उपलब्ध कराना है। यह स्थान स्थानीय नागरिकों, युवाओं और पर्यटकों के लिए नया आकर्षण बनेगा। विशेष रूप से शाम के समय यहां का दृश्य और अधिक आकर्षक दिखाई देगा, जिससे पर्यटक अनुभव को और बेहतर बनाया जा सकेगा।

पर्यटन विकास को मिलेगा नया आयाम

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि झालावाड़ जिले में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। गागरोन दुर्ग, गढ़ पैलेस, चंद्रभागा मंदिर, झालरापाटन सहित अनेक ऐतिहासिक स्थल यहां मौजूद हैं, जिन्हें विकसित कर जिले को पर्यटन हब बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि “गागरोन दुर्ग गैलरी” और “सेल्फी पॉइंट” जैसे प्रयास पर्यटन गतिविधियों को गति देंगे और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेंगे।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पर्यटकों के लिए आवश्यक सुविधाओं जैसे मार्गदर्शन, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था और सूचना बोर्ड की व्यवस्था भी मजबूत की जाए। साथ ही स्थानीय कला और हस्तशिल्प को भी बढ़ावा दिया जाए, ताकि पर्यटक यहां की संस्कृति से जुड़ सकें।

 

कार्यक्रम के दौरान उप वन संरक्षक सागर पंवार, पर्यटन विभाग के सहायक निदेशक सिराज कुरैशी, उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय के पूर्व डीन डॉ. मधुसूदन आचार्य सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में स्थानीय नागरिकों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया और पर्यटन विकास की इस पहल का स्वागत किया।

 

इन दोनों नई सौगातों के साथ झालावाड़ जिले में पर्यटन को नया आयाम मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। “गागरोन दुर्ग गैलरी” जहां इतिहास को जीवंत रूप में प्रस्तुत करेगी, वहीं गढ़ पैलेस सेल्फी पॉइंट पर्यटकों के लिए यादगार अनुभव का नया केंद्र बनेगा।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

झालावाड़ की बेटी अंतिमा कुमारी को कोटा आइकॉन अवॉर्ड, अभिनेत्री कांची सिंह ने किया सम्मानित

झालावाड़ की बेटी अंतिमा कुमारी को कोटा में आयोजित आइकॉन अवॉर्ड समारोह में सम्मानित किया गया। यह सम्मान प्रसिद्ध टीवी अभिनेत्री कांची सिंह ने मंच पर प्रदान किया। कांची सिंह लोकप्रिय धारावाहिक ससुराल सिमर का, और प्यार हो गया और यह रिश्ता क्या कहलाता है में अपने अभिनय के लिए जानी जाती हैं। समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया, जिसमें अंतिमा कुमारी की उपलब्धियों ने विशेष रूप से सभी का ध्यान आकर्षित किया। मंच पर जैसे ही उनका नाम पुकारा गया, उपस्थित लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका स्वागत किया।

अंतिमा कुमारी मूल रूप से झालावाड़ जिले की रहने वाली हैं और उन्होंने शिक्षा, कला तथा सामाजिक गतिविधियों के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने जीएनएम के साथ-साथ लॉ और एलएलबी की पढ़ाई पूरी की है। शिक्षा के प्रति उनके समर्पण ने उन्हें न केवल अकादमिक क्षेत्र में मजबूत बनाया, बल्कि सामाजिक विषयों को समझने और समाज के बीच सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर भी दिया। पढ़ाई के साथ उन्होंने अभिनय क्षेत्र में भी कदम रखा और लगातार मेहनत के बल पर अपनी प्रतिभा को निखारा।

 

अभिनय के क्षेत्र में अंतिमा कुमारी ने कई मंचीय प्रस्तुतियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लिया। इसके अलावा उन्होंने दूरदर्शन पर प्रसारित धारावाहिक “अवंतिका” में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस धारावाहिक में उनके अभिनय को दर्शकों ने सराहा और उन्हें एक उभरती कलाकार के रूप में पहचान मिली। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से यह मुकाम हासिल किया। अभिनय के साथ-साथ उन्होंने सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता फैलाने के कार्यक्रमों में भी भागीदारी निभाई, जिससे उनकी पहचान एक जागरूक और सक्रिय युवती के रूप में बनी।

कोटा में आयोजित आइकॉन अवॉर्ड समारोह में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए प्रतिभागियों को उनके कार्यों के आधार पर सम्मानित किया गया। इस दौरान अंतिमा कुमारी को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों, कला प्रतिभा और सामाजिक सक्रियता को देखते हुए आइकॉन अवॉर्ड प्रदान किया गया। कार्यक्रम के दौरान कांची सिंह ने कहा कि छोटे शहरों से आने वाली प्रतिभाएं मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर बड़े मंच तक पहुंच रही हैं, जो प्रेरणादायक है। उन्होंने अंतिमा कुमारी को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं और निरंतर आगे बढ़ते रहने का संदेश दिया।

अंतिमा कुमारी ने सम्मान प्राप्त करने के बाद आयोजकों, परिवार और समर्थकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उनके लिए प्रेरणा का स्रोत है और आगे भी वे शिक्षा और अभिनय दोनों क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन करने का प्रयास करेंगी। उन्होंने युवाओं से भी अपील की कि वे अपनी रुचि के अनुसार मेहनत करें और अवसर मिलने पर पीछे न हटें।

सम्मान मिलने की खबर जैसे ही झालावाड़ पहुंची, परिजनों और क्षेत्रवासियों में खुशी की लहर दौड़ गई। लोगों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी जताई और अंतिमा कुमारी को बधाइयां दीं। स्थानीय लोगों ने इसे जिले के लिए गर्व का क्षण बताया और कहा कि उनकी सफलता से अन्य युवाओं को भी प्रेरणा मिलेगी। सामाजिक संगठनों और परिचितों ने भी उन्हें शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनकी उपलब्धि से जिले का नाम रोशन हुआ है।

अंतिमा कुमारी की इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी बड़े शहर की मोहताज नहीं होती। दृढ़ संकल्प, मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर कोई भी युवा अपनी मंजिल हासिल कर सकता है। शिक्षा, अभिनय और सामाजिक सक्रियता—तीनों क्षेत्रों में संतुलन बनाते हुए उन्होंने जो मुकाम हासिल किया है, वह निश्चित रूप से प्रेरणादायक है। लोगों को उम्मीद है कि आने वाले समय में अंतिमा कुमारी और भी बड़े मंचों पर जिले और प्रदेश का नाम रोशन करेंगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

चंदीपुर रेणु हत्याकांड का खुलासा: पत्नी की हत्या कर हादसा दिखाने की साजिश, पति देवीकृपाल गिरफ्तार 🚨

 

 

 

झालावाड़ जिले के चंदीपुर गांव में हुए बहुचर्चित रेणु हत्याकांड का पुलिस ने पर्दाफाश करते हुए पति देवीकृपाल को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी ने अपनी पत्नी की हत्या कर उसे दुर्घटना का रूप देने की साजिश रची थी। मामले का खुलासा वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी विश्लेषण, फॉरेंसिक साक्ष्य और क्राइम सीन रिक्रिएशन के आधार पर किया गया। पुलिस ने इस मामले को संवेदनशील और जटिल बताते हुए कहा कि कई स्तरों पर जांच के बाद सच्चाई सामने आई।

 

पुलिस के अनुसार 9 नवंबर 2025 को चंदीपुर गांव निवासी विवाहित महिला रेणु की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। घटना के बाद परिजनों की ओर से बताया गया कि रेणु सीढ़ियों से गिर गई थी, जिससे उसकी मौत हो गई। शुरुआत में मामला दुर्घटना जैसा प्रतीत हुआ, लेकिन पुलिस को मिले गोपनीय इनपुट और कुछ परिस्थितिजन्य साक्ष्यों ने संदेह पैदा कर दिया। इसके बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए गहन जांच शुरू की।

जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य एकत्रित किए। मृतका के पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर कई गंभीर चोटें सामने आईं। चिकित्सकीय राय में यह स्पष्ट हुआ कि चोटों की प्रकृति सामान्य गिरने से मेल नहीं खाती। इसके बाद पुलिस ने घटनास्थल का क्राइम सीन रिक्रिएशन कराया। बताया जा रहा है कि झालावाड़ जिले में इस तरह का क्राइम सीन रिक्रिएशन पहली बार किया गया, जिससे घटनाक्रम को समझने में महत्वपूर्ण मदद मिली। इस प्रक्रिया में यह स्पष्ट हुआ कि घटना को दुर्घटना दिखाने की कोशिश की गई थी।

 

पुलिस ने तकनीकी जांच के तहत होटल और अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले। इन फुटेज में आरोपी देवीकृपाल और उसके साथियों की गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं। फुटेज से यह भी सामने आया कि घटना के बाद आरोपी ने स्थिति को सामान्य दिखाने और साक्ष्य छिपाने की कोशिश की। पुलिस ने इन डिजिटल साक्ष्यों को केस में महत्वपूर्ण माना। इसके अलावा कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी विश्लेषण से भी आरोपी की भूमिका मजबूत हुई।

 

जांच के दौरान पुलिस को यह भी जानकारी मिली कि आरोपी के अन्य महिलाओं से अवैध संबंध थे। पुलिस के अनुसार यही विवाद हत्या का मुख्य कारण बना। दंपति के बीच इस मुद्दे को लेकर लंबे समय से तनाव चल रहा था। घटना वाले दिन भी इसी बात को लेकर विवाद हुआ, जिसके बाद आरोपी ने पत्नी की हत्या कर दी और इसे हादसा बताने की योजना बनाई। आरोपी ने परिजनों को भी सीढ़ियों से गिरने की कहानी बताई ताकि मामला दुर्घटना के रूप में दर्ज हो जाए।

पुलिस टीम ने जब आरोपी को गिरफ्तार करने की कार्रवाई की तो उसने भागने की कोशिश की। गिरफ्तारी के दौरान आरोपी ने पुलिस टीम पर गाड़ी चढ़ाकर जानलेवा हमला करने का प्रयास किया। हालांकि पुलिस ने सतर्कता दिखाते हुए उसे काबू में कर लिया। इस घटना के बाद आरोपी के खिलाफ राजकार्य में बाधा और जानलेवा हमले का अलग से मामला भी दर्ज किया गया है। पुलिस ने बताया कि आरोपी को विधिवत गिरफ्तार कर लिया गया है।

 

 

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले में वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों का व्यापक उपयोग किया गया। क्राइम सीन रिक्रिएशन, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को जोड़कर पूरे घटनाक्रम को पुनर्निर्मित किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने घटना के बाद अस्पताल ले जाने, लोगों को सूचना देने और दुर्घटना की कहानी गढ़ने जैसी कई कोशिशें कीं, ताकि संदेह उससे दूर रहे।

फिलहाल आरोपी को न्यायालय में पेश कर दिया गया है, जहां से उसे पुलिस रिमांड पर लेने की प्रक्रिया की जा रही है। पुलिस का कहना है कि मामले में अन्य संदिग्ध व्यक्तियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। यदि जांच में किसी अन्य की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने यह भी कहा कि मामले में जुटाए गए सभी साक्ष्यों को न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा।

झालावाड़ पुलिस ने इस केस के खुलासे को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। अधिकारियों के अनुसार आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक जांच और लगातार निगरानी के कारण जटिल प्रतीत होने वाला मामला सुलझाया जा सका। पुलिस ने आमजन से अपील की है कि संदिग्ध घटनाओं में सही जानकारी दें और किसी भी मामले को दुर्घटना मानकर अनदेखा न करें।

इस पूरे घटनाक्रम के खुलासे के बाद क्षेत्र में चर्चा का माहौल है। बहुचर्चित मामले में पुलिस की कार्रवाई से लोगों ने राहत की सांस ली है। वहीं मृतका के परिजनों ने निष्पक्ष जांच के लिए पुलिस का आभार जताया है और आरोपी को कड़ी सजा दिलाने की मांग की है। पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और जल्द ही मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

झालावाड़ की ‘पहली शादी’ बनी चर्चा का विषय, भव्य आयोजन में जुटीं बड़ी हस्तियां

झालावाड़। शहर इन दिनों एक ऐसे भव्य विवाह समारोह का साक्षी बन रहा है, जिसे लोग “झालावाड़ की पहली शादी” के रूप में चर्चा में ले रहे हैं। पूर्व कैबिनेट मंत्री S. N. Gupta की पौत्री के इस दो दिवसीय विवाह समारोह ने न केवल सामाजिक बल्कि राजनीतिक स्तर पर भी खास पहचान बना ली है। शहर के प्रतिष्ठित होटल मिस्टन में आयोजित इस समारोह में प्रदेश और देश की कई जानी-मानी हस्तियों की मौजूदगी ने आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।

 

इस भव्य आयोजन की खास बात इसकी भव्यता, व्यवस्थाएं और वीआईपी मेहमानों की लंबी सूची रही। विवाह समारोह में Om Birla का आगमन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। लोकसभा स्पीकर के पहुंचने पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। एस.एन. गुप्ता ने उन्हें दुपट्टा पहनाकर सम्मानित किया। इस दौरान ओम बिरला ने वर-वधू को आशीर्वाद देते हुए उनके सुखद और समृद्ध वैवाहिक जीवन की कामना की।

समारोह में दुल्हन श्रीनिधि, जो संदीप गुप्ता और ऋतु गुप्ता की पुत्री हैं, को आशीर्वाद देने के लिए कई राजनीतिक हस्तियां मौजूद रहीं। कार्यक्रम में Madan Dilawar, Pratap Singhvi, Anil Jain, Nirmal Saklecha, Kailash Meena और Suresh Gurjar सहित कई जनप्रतिनिधियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

इस विवाह समारोह को “पहली शादी” कहे जाने के पीछे इसकी भव्यता और व्यापक स्तर पर की गई तैयारियां प्रमुख कारण हैं। होटल मिस्टन को विशेष रूप से सजाया गया है, जहां पारंपरिक और आधुनिक सजावट का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। आकर्षक लाइटिंग, फूलों की सजावट और विशेष आतिथ्य व्यवस्थाओं ने मेहमानों का मन मोह लिया। भोजन व्यवस्था में भी विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का समावेश किया गया, जिससे बाहर से आए अतिथि भी प्रभावित नजर आए।

 

 

सुरक्षा और प्रबंधन की दृष्टि से भी आयोजन पूरी तरह व्यवस्थित रहा। वीआईपी मेहमानों के आगमन को देखते हुए प्रशासन और पुलिस ने विशेष इंतजाम किए। पार्किंग, आवागमन और सुरक्षा व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया गया।

समारोह के दूसरे दिन भी कई बड़ी हस्तियों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। जानकारी के अनुसार Om Mathur और Gulab Chand Kataria सहित अन्य गणमान्य अतिथि वर-वधू को आशीर्वाद देने पहुंच सकते हैं।

 

 

इस पूरे आयोजन ने झालावाड़ को एक बार फिर प्रदेश के राजनीतिक और सामाजिक नक्शे पर प्रमुखता से ला दिया है। शहरवासियों में इस विवाह को लेकर खासा उत्साह है और लोग इसे लंबे समय तक याद रखने वाले आयोजन के रूप में देख रहे हैं। कुल मिलाकर, यह शादी केवल एक पारिवारिक समारोह नहीं, बल्कि एक भव्य सामाजिक और राजनीतिक संगम के रूप में सामने आई है, जिसने “झालावाड़ की पहली शादी” के रूप में अपनी अलग पहचान बना ली है।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

संत रामपाल जी महाराज का एक दिवसीय सत्संग का हुआ समापन

 

झालावाड़ जिले के गंगधार कस्बे में रविवार को संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों द्वारा एक दिवसीय सत्संग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सर्व धर्म समभाव और शास्त्रों के आधार पर आयोजित इस सत्संग में क्षेत्र सहित आसपास के गांवों से सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। कार्यक्रम का प्रसारण एलईडी स्क्रीन के माध्यम से किया गया, जिससे बड़ी संख्या में लोगों ने एक साथ सत्संग का लाभ लिया। इस धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन मुनींद्र धर्मार्थ ट्रस्ट, हरियाणा के तत्वावधान में किया गया।

कार्यक्रम सुबह से ही श्रद्धालुओं की उपस्थिति के साथ शुरू हुआ। सत्संग स्थल पर अनुशासित व्यवस्था देखने को मिली, जहां श्रद्धालु भक्ति भाव से बैठकर संत रामपाल जी महाराज के आध्यात्मिक प्रवचनों को सुनते रहे। आयोजकों द्वारा पूरे कार्यक्रम की सुव्यवस्थित व्यवस्था की गई थी, जिससे दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई।

 

 

सत्संग के दौरान संत रामपाल जी महाराज ने अपने प्रवचनों में समाज में फैली कुरीतियों, अंधविश्वास और पाखंडवाद पर प्रहार करते हुए श्रद्धालुओं को शास्त्रों के अनुसार भक्ति करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज के समय में मनुष्य अनेक प्रकार के भ्रम और दिखावे में उलझ गया है, जबकि शास्त्रों में स्पष्ट रूप से सच्ची भक्ति का मार्ग बताया गया है। यदि मनुष्य उस मार्ग को अपनाता है तो वह न केवल अपने जीवन को सुखमय बना सकता है बल्कि मोक्ष की प्राप्ति भी कर सकता है।

उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे कोई व्यक्ति ट्रेन में यात्रा करते समय कम से कम सामान लेकर चलता है, ताकि उसे यात्रा के दौरान परेशानी न हो। उसी प्रकार मनुष्य को भी इस जीवन रूपी यात्रा में अधिक मोह-माया में नहीं उलझना चाहिए और भगवान का स्मरण करते हुए जीवन जीना चाहिए। उन्होंने कहा कि मनुष्य का जीवन अस्थायी है और इस संसार में कोई भी वस्तु स्थायी नहीं है, इसलिए परमात्मा की भक्ति ही मनुष्य के जीवन का सच्चा आधार है।

संत रामपाल जी महाराज ने कहा कि कलयुग में परमात्मा को पाने का सबसे सरल और सच्चा मार्ग सच्चे सतगुरु से नाम दीक्षा लेकर भक्ति करना है। उन्होंने बताया कि शास्त्रों में वर्णित विधि से भक्ति करने पर ही मनुष्य को पूर्ण लाभ प्राप्त होता है। यदि कोई व्यक्ति केवल दिखावे या परंपराओं के आधार पर पूजा-पाठ करता है, तो उससे आध्यात्मिक उन्नति संभव नहीं होती। इसलिए हर व्यक्ति को शास्त्रों का अध्ययन कर सही मार्ग को अपनाना चाहिए।

सत्संग के दौरान मानव जीवन के महत्व पर भी विस्तार से प्रकाश डाला गया। संत रामपाल जी महाराज ने बताया कि मनुष्य जन्म अत्यंत दुर्लभ है और यह बार-बार प्राप्त नहीं होता। इसलिए इस अमूल्य जीवन को व्यर्थ के विवादों, अहंकार और भौतिक इच्छाओं में न गंवाकर परमात्मा की भक्ति में लगाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति सच्चे मन से भगवान का स्मरण करता है, उसका जीवन स्वतः ही सुखमय और शांतिमय हो जाता है।

 

सत्संग में आध्यात्मिक संदेशों के माध्यम से श्रद्धालुओं को प्रेरित किया गया। कार्यक्रम के दौरान ‘तीनों देवा कमल दल बसे, ब्रह्मा विष्णु महेश। प्रथम इनकी वंदना, फिर सुन सतगुरु उपदेश’ जैसे शब्दों के माध्यम से भक्ति का महत्व बताया गया। श्रद्धालु पूरे कार्यक्रम के दौरान भक्ति भाव से सत्संग का श्रवण करते रहे।

कार्यक्रम में सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने पर भी विशेष जोर दिया गया। सेवादारों ने बताया कि संत रामपाल जी महाराज के सत्संगों का मुख्य उद्देश्य समाज में फैली बुराइयों को समाप्त करना और लोगों को सही दिशा देना है। दहेज प्रथा, नशाखोरी, छुआछूत और अन्य सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता फैलाना भी इन सत्संगों का प्रमुख लक्ष्य है।

सत्संग के दौरान श्रद्धालुओं के लिए चाय-राम, जल-राम और पुस्तक सेवा की व्यवस्था भी की गई। सेवादारों ने तन, मन और धन से सेवा करते हुए कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आयोजन स्थल पर सेवा भावना का अद्भुत उदाहरण देखने को मिला, जहां स्वयंसेवक पूरे समय श्रद्धालुओं की सहायता में जुटे रहे।

कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने बताया कि इस प्रकार के सत्संग समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का माध्यम बनते हैं। इससे लोगों में आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ती है और समाज में भाईचारे की भावना मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि आगे भी क्षेत्र में इस प्रकार के धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे लोगों को शास्त्रों के अनुसार भक्ति का सही मार्ग मिल सके।

गंगधार में आयोजित इस एक दिवसीय सत्संग में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भागीदारी ने यह साबित किया कि लोगों में आध्यात्मिकता के प्रति गहरी आस्था है। कार्यक्रम का समापन शांतिपूर्ण वातावरण और भक्ति भाव के साथ हुआ। आयोजकों और सेवादारों ने सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज को शास्त्रों के अनुसार भक्ति मार्ग से जोड़ना ही इस सत्संग का मुख्य उद्देश्य है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

डूंगरगांव घाटी में कंटेनर का कहर, बाइक सवार बुजुर्ग की मौके पर मौत, कंटेनर सवार दो घायल

झालावाड़ जिले के नेशनल हाईवे-52 पर अकलेरा रोड स्थित डूंगरगांव घाटी के पास रविवार को एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। यहां एक कंटेनर के अनियंत्रित होकर बाइक से टकराने से बाइक सवार बुजुर्ग व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कंटेनर में सवार दो युवक घायल हो गए। हादसे के बाद हाईवे पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को उपचार के लिए जिला अस्पताल भिजवाया।

अकलेरा थाना पुलिस और घायलों से मिली जानकारी के अनुसार भरतपुर जिले के भंवरी गांव निवासी वाकिब और उसका भाई मुकीम जयपुर से कोरियर का सामान लेकर कंटेनर से बेंगलुरु जा रहे थे। दोनों भाई अपने कंटेनर से नेशनल हाईवे-52 से गुजर रहे थे। जब उनका कंटेनर अकलेरा थाना क्षेत्र के डूंगरगांव घाटी के पास पहुंचा, तभी अचानक कंटेनर चालक का संतुलन बिगड़ गया और वाहन पुलिया से टकरा गया।

बताया जा रहा है कि पुलिया से टकराने के बाद कंटेनर अनियंत्रित हो गया और सामने से आ रहे बाइक सवार को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक सवार बुजुर्ग व्यक्ति सड़क पर दूर जा गिरा और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद घटनास्थल पर मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया और आसपास के ग्रामीण व राहगीर तुरंत मदद के लिए दौड़ पड़े।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसा इतना अचानक हुआ कि किसी को संभलने का मौका ही नहीं मिला। कंटेनर के पुलिया से टकराने के बाद बाइक सवार सीधे उसकी चपेट में आ गया। बाइक भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। हादसे के बाद कंटेनर में सवार दोनों युवक भी घायल हो गए।

घटना की सूचना मिलते ही अकलेरा थाना पुलिस और असनावर थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को बाहर निकाला और उन्हें एंबुलेंस के माध्यम से उपचार के लिए झालावाड़ जिला अस्पताल भिजवाया। अस्पताल में दोनों घायलों का उपचार किया गया। चिकित्सकों के अनुसार उनकी हालत फिलहाल खतरे से बाहर बताई जा रही है।

हादसे में जान गंवाने वाले बुजुर्ग की पहचान असनावर क्षेत्र के अकतासा गांव निवासी बद्रीलाल के रूप में हुई है। घटना की सूचना मिलते ही उनके परिजन और गांव के लोग भी मौके पर पहुंच गए। अचानक हुई इस दुर्घटना से परिवार में मातम छा गया और पूरे गांव में शोक का माहौल बन गया।

पुलिस ने मृतक के शव को कब्जे में लेकर असनावर अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया है। जहां पोस्टमार्टम की तैयारियां की जा रही हैं। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा।

अकलेरा थाना अधिकारी धर्माराम ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का जायजा लिया। हादसे के कारण हाईवे पर कुछ समय के लिए यातायात बाधित हो गया था। पुलिस ने क्रेन की सहायता से कंटेनर को सड़क से हटवाकर साइड में करवाया, जिसके बाद यातायात को सुचारू रूप से चालू कराया गया।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक जांच में कंटेनर के पुलिया से टकराने के बाद अनियंत्रित होने की बात सामने आई है। हालांकि हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। कंटेनर चालक से भी पूछताछ की जा रही है और दुर्घटना के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

 

स्थानीय लोगों का कहना है कि डूंगरगांव घाटी का यह क्षेत्र पहले भी कई सड़क हादसों का गवाह बन चुका है। घाटी होने के कारण यहां सड़क पर मोड़ और ढलान है, जिससे वाहन चालकों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। कई बार तेज रफ्तार और लापरवाही के कारण वाहन चालक नियंत्रण खो बैठते हैं और हादसे हो जाते हैं।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस क्षेत्र में यातायात सुरक्षा के अतिरिक्त इंतजाम किए जाएं। उनका कहना है कि घाटी वाले हिस्से में चेतावनी संकेतक, स्पीड कंट्रोल के उपाय और नियमित पुलिस गश्त बढ़ाने की जरूरत है, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों को रोका जा सके।

फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दुर्घटना के कारणों की गहन जांच की जा रही है और यदि किसी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और वाहन चालकों की जिम्मेदारी की ओर ध्यान दिलाया है। तेज रफ्तार और जरा-सी लापरवाही कई बार किसी की जान ले लेती है। ऐसे में वाहन चालकों को सावधानी और यातायात नियमों का पालन करते हुए वाहन चलाना बेहद जरूरी है, ताकि इस तरह की दुखद घटनाओं से बचा जा सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

कालबेलिया समाज में पहली बार हेलीकॉप्टर से हुई दुल्हन की विदाई खानपुर में देखने उमड़ी भीड़, साढ़े आठ लाख रुपए आया खर्च

खानपुर। उपखंड क्षेत्र में शुक्रवार को एक अनोखी शादी पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गई। घुमंतु कालबेलिया समाज में पहली बार दुल्हन की विदाई हेलीकॉप्टर से की गई। इस अनूठे दृश्य को देखने के लिए नगर के समीप बनाए गए अस्थायी हेलीपैड पर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। जैसे ही हेलीकॉप्टर आसमान में उड़ा, लोगों ने तालियां बजाकर नवदंपती को शुभकामनाएं दीं। बताया जा रहा है कि इस विशेष व्यवस्था पर करीब साढ़े आठ लाख रुपए का खर्च आया।

जानकारी के अनुसार उपखंड क्षेत्र के नयागांव (कालबेलिया टापरिया) निवासी रोहित जोगी पुत्र सिंधीनाथ जोगी गुरुवार को बारात लेकर सोयली गांव पहुंचे थे। यहां गुरुवार देर रात पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ रोहित का विवाह सोयली निवासी रामुनाथ की पुत्री आरती के साथ संपन्न हुआ। विवाह समारोह में दोनों परिवारों के रिश्तेदारों और समाज के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

शादी के बाद शुक्रवार को दुल्हन की विदाई को खास बनाने के लिए हेलीकॉप्टर की व्यवस्था की गई थी। सुबह से ही आसपास के गांवों और कस्बों से लोग इस अनोखे नजारे को देखने के लिए पहुंचने लगे थे। नगर के समीप बनाए गए हेलीपैड पर जब हेलीकॉप्टर उतरा तो वहां मौजूद लोगों में उत्साह देखने लायक था। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी इस दृश्य को अपने मोबाइल कैमरों में कैद करते नजर आए।

विदाई के समय दुल्हन आरती भावुक हो गई, वहीं परिवार के सदस्य भी भावनात्मक माहौल में नजर आए। इसके बाद रोहित जोगी अपनी नवविवाहिता पत्नी आरती के साथ हेलीकॉप्टर में सवार हुए और वहां से खानपुर के लिए रवाना हो गए। जैसे ही हेलीकॉप्टर उड़ान भरने लगा, लोगों ने हाथ हिलाकर नवदंपती को शुभकामनाएं दीं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कालबेलिया समाज में इस तरह की विदाई पहली बार देखने को मिली है। आमतौर पर समाज में शादियां पारंपरिक तरीके से ही संपन्न होती हैं, लेकिन इस बार परिवार ने अपनी बहू की विदाई को यादगार बनाने के लिए हेलीकॉप्टर का इंतजाम किया। यही कारण है कि यह शादी पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई।

हेलीकॉप्टर से विदाई की खबर फैलते ही आसपास के गांवों के लोग भी मौके पर पहुंच गए। कई लोग अपने परिवार के साथ केवल इस अनोखे नजारे को देखने के लिए आए थे। कुछ लोगों ने इसे समाज के बदलते दौर और नई सोच का प्रतीक बताया, तो कुछ लोगों ने इसे यादगार पल कहा।

बताया जा रहा है कि हेलीकॉप्टर किराए, हेलीपैड की व्यवस्था और अन्य तैयारियों पर करीब साढ़े आठ लाख रुपए का खर्च आया। हालांकि परिवार का कहना है कि उन्होंने यह व्यवस्था केवल इसलिए की ताकि उनकी बहू की विदाई जीवन भर के लिए यादगार बन सके।

इस अनोखी विदाई की चर्चा अब पूरे क्षेत्र में हो रही है। सोशल मीडिया पर भी इस शादी की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। लोग इसे कालबेलिया समाज के लिए एक ऐतिहासिक और अनूठा पल बता रहे हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार, इस तरह की अनोखी शादियां न केवल लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बनती हैं, बल्कि समाज में एक अलग पहचान भी बनाती हैं। फिलहाल खानपुर क्षेत्र में यह शादी चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग नवदंपती को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दे रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

अनाथ बच्चे की पीड़ा सुनकर भावुक हुआ शिक्षक, अगले दिन दिलाए नए कपड़े — राजस्थान का वीडियो वायरल

Oplus_16908288

Jhalawar राजस्थान के करौली जिले से सामने आया एक भावुक कर देने वाला वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में एक सरकारी स्कूल का छात्र अपने शिक्षक को अपनी मजबूरी बताते हुए रो पड़ता है। बच्चे की बात सुनकर शिक्षक भी भावुक हो जाते हैं और उसे गले लगाकर सांत्वना देते हैं। बताया जा रहा है कि यह वीडियो करौली जिले के हिंडौन सिटी क्षेत्र के बामनपुरा गांव के एक सरकारी स्कूल का है।

वायरल वीडियो में दिखाई दे रहा है कि कक्षा के दौरान शिक्षक बच्चों से बातचीत कर रहे होते हैं। इसी दौरान एक छात्र खड़ा होकर बताता है कि उसके पास नई पैंट खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं। बच्चा कहता है कि उसके माता-पिता की सड़क दुर्घटना में मौत हो चुकी है और अब वह अपने दादा के साथ रहता है। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उसे अपने दादा की पेंशन आने का इंतजार करना पड़ता है, तभी उसके लिए कपड़े खरीदे जा सकते हैं।

बच्चे की यह बात सुनकर कक्षा में सन्नाटा छा जाता है। शिक्षक भी यह सुनकर बेहद भावुक हो जाते हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि शिक्षक बच्चे को पास बुलाकर उसे गले लगाते हैं और उसका हौसला बढ़ाते हैं। शिक्षक बच्चे को भरोसा दिलाते हैं कि उसे चिंता करने की जरूरत नहीं है।

बताया जा रहा है कि बच्चे की स्थिति से प्रभावित होकर शिक्षक ने अगले ही दिन उसके लिए नए कपड़े खरीदकर दिए। जब बच्चे को नए कपड़े दिए गए तो वह बेहद खुश नजर आया। इस घटना ने स्कूल के अन्य बच्चों और शिक्षकों को भी भावुक कर दिया।

सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लाखों लोग देख चुके हैं और शिक्षक की संवेदनशीलता की जमकर सराहना कर रहे हैं। कई लोग इसे शिक्षा व्यवस्था में मानवीय संवेदनाओं का उदाहरण बता रहे हैं। लोगों का कहना है कि ऐसे शिक्षक ही बच्चों के जीवन में उम्मीद की किरण बनते हैं और कठिन परिस्थितियों में उनका सहारा बनते हैं।

यह घटना ग्रामीण भारत में आर्थिक रूप से कमजोर और अनाथ बच्चों की कठिन परिस्थितियों को भी उजागर करती है। कई बच्चे माता-पिता के न रहने के बाद दादा-दादी या रिश्तेदारों के सहारे अपना जीवन बिताते हैं। सीमित आय और संसाधनों के कारण उनकी पढ़ाई और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी कई बार मुश्किल हो जाता है।

अंतरराष्ट्रीय संस्था UNICEF के अनुमान के अनुसार भारत में 3 करोड़ से अधिक बच्चे ऐसे हैं जो अनाथ हैं या अपने माता-पिता में से किसी एक को खो चुके हैं। इनमें से बड़ी संख्या ऐसे बच्चों की है जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों में रहते हैं और अक्सर सरकारी सहायता, पेंशन या सीमित आय के सहारे अपना जीवन यापन करते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे बच्चों के लिए स्कूल और शिक्षक की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। कई बार शिक्षक ही उनके लिए अभिभावक जैसी भूमिका निभाते हैं और उन्हें भावनात्मक व सामाजिक सहारा प्रदान करते हैं।

करौली जिले से सामने आया यह वीडियो इसी मानवीय संवेदना का उदाहरण बन गया है। एक तरफ जहां यह वीडियो लोगों को भावुक कर रहा है, वहीं यह समाज को यह भी सोचने पर मजबूर कर रहा है कि आर्थिक रूप से कमजोर और अनाथ बच्चों की मदद के लिए सामूहिक प्रयास कितने जरूरी हैं।

सोशल मीडिया पर लोग शिक्षक के इस कदम को प्रेरणादायक बता रहे हैं। कई यूजर्स ने लिखा कि समाज में अगर ऐसे संवेदनशील लोग हों तो जरूरतमंद बच्चों का भविष्य बेहतर बनाया जा सकता है।

फिलहाल यह वीडियो इंटरनेट पर तेजी से शेयर किया जा रहा है और लोग इसे मानवीयता और करुणा का एक सुंदर उदाहरण बता रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *