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झालरापाटन। धार्मिक आस्था और फागुनी उत्साह के बीच रविवार को झालरापाटन में भगवान द्वारकाधीश की 64वीं भव्य परिक्रमा यात्रा श्रद्धा और उल्लास के साथ निकाली गई। सुबह 7:30 बजे द्वारकाधीश मंदिर में नौबत बाजा बजने के साथ यात्रा का शुभारंभ हुआ। मंदिर प्रांगण से शुरू हुई 10 किलोमीटर लंबी यह परिक्रमा लगभग पांच घंटे में पूर्ण हुई। यात्रा में महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही और करीब 90 प्रतिशत महिलाएं इसमें शामिल हुईं।
यात्रा की शुरुआत भगवान द्वारकाधीश की सुसज्जित झांकी के साथ हुई, जो ढोल-नगाड़ों और बैंड की मधुर धुनों के बीच आगे बढ़ रही थी। झांकी के पीछे भजन गाती और फागुन के पारंपरिक गीतों पर थिरकती महिलाओं का समूह चल रहा था। युवतियों और महिलाओं ने सिर पर चुनरियां ओढ़े, हाथों में ध्वज और गुलाल लिए पूरे मार्ग में भक्ति का रंग बिखेरा। युवक-युवतियों, पुरुषों और छोटे बच्चों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लेकर यात्रा को जनआस्था का महापर्व बना दिया।
परिक्रमा मार्ग शहर के प्रमुख हिस्सों से होकर गुजरा। यात्रा पीपली बाजार, नगर पालिका परिसर, गिंदौर गेट, दादाबाड़ी और सूरजपोल गेट से आगे बढ़ी। इसके बाद सेठों का चौराहा, पुरानी सब्जी मंडी और सूर्य मंदिर से होते हुए इमली गेट से शहर के बाहरी क्षेत्र की ओर निकली। वहां से यह उम्मेदपुरा गांव, कपासियां कुआं, रलायती गांव, वसुंधरा कॉलोनी और विवेकानंद सर्किल से होती हुई पुनः द्वारकाधीश मंदिर पहुंची। पूरे मार्ग में श्रद्धालु रंग-गुलाल उड़ाते और “राधे-राधे” व “जय श्री कृष्ण” के जयकारों के साथ आगे बढ़ते रहे।
यात्रा के दौरान विभिन्न समाजसेवी संस्थाओं और व्यापारिक संगठनों ने जगह-जगह श्रद्धालुओं के स्वागत की व्यवस्था की। व्यापार संघ के पदाधिकारियों ने ठंड के मौसम को ध्यान में रखते हुए यात्रियों के लिए चाय की विशेष व्यवस्था की। कई स्थानों पर फल, मिठाई, ठंडाई और प्रसाद का वितरण किया गया। सूर्य मंदिर से इमली गेट तक महिलाओं ने घर-घर आरती उतारी और यात्रियों को नारियल-शक्कर का प्रसाद भेंट किया।

सूर्य मंदिर पर श्री बड़ा मंदिर बालाजी सेवा दल और श्री हठीले हनुमान पशुपतिनाथ सेवा दल द्वारा विशेष आयोजन किया गया। यहां सेवादारों ने भगवान के रथ और श्रद्धालुओं पर 100 किलो गुलाब की पंखुड़ियों और 50 किलो गुलाल की भव्य वर्षा की। पूरा वातावरण गुलाबी और लाल रंग में रंग गया। इस अवसर पर भगवान द्वारकाधीश की महाआरती भी संपन्न हुई, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्मलाभ अर्जित किया।
इस ऐतिहासिक परिक्रमा यात्रा में झालावाड़ जिले के अलावा बारां, कोटा और बूंदी से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। वहीं मध्यप्रदेश के राजगढ़, ब्यावरा, सोयत, सुसनेर और आगर जिलों से भी भक्तजन शामिल हुए। बाहर से आए श्रद्धालुओं ने झालरापाटन की धार्मिक परंपरा और व्यवस्थाओं की सराहना की।

यात्रा के सफल संचालन में दोनों सेवा दलों के पदाधिकारियों और स्वयंसेवकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। सुरेश शर्मा, राधेश्याम चौरसिया, राजेंद्र मीडिया और गोविंद शर्मा सहित अनेक कार्यकर्ताओं ने व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाई। पुलिस प्रशासन और स्थानीय स्वयंसेवकों ने भी यातायात व्यवस्था संभालकर यात्रा को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया।
पांच घंटे तक चली इस परिक्रमा यात्रा ने शहर को भक्ति, रंग और उत्साह से सराबोर कर दिया। फागुन माह में निकली यह यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बनी, बल्कि सामाजिक एकता और सामूहिक सहयोग का भी प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत कर गई।