झालावाड़: एसआरजी अस्पताल के पालना गृह में 4-5 दिन की नवजात को छोड़कर गई महिला, बाल कल्याण समिति ने संभाली जिम्मेदारी

झालावाड़। शहर के एसआरजी अस्पताल के पालना गृह में बुधवार सुबह एक महिला नवजात शिशु को छोड़कर चली गई। घटना की सूचना सुबह करीब 10 बजे अस्पताल प्रशासन को मिली। जानकारी मिलते ही अस्पताल स्टाफ में हलचल मच गई और शिशु को तत्काल सुरक्षित अपने संरक्षण में लेकर नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों की टीम ने तुरंत प्राथमिक उपचार और निगरानी शुरू कर दी।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार नवजात करीब चार से पांच दिन की बताई जा रही है। हालांकि, चिकित्सकों का कहना है कि विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण और आवश्यक जांचों के बाद ही शिशु की सही उम्र और स्वास्थ्य की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। अस्पताल प्रशासन के अनुसार शिशु का वजन, तापमान, संक्रमण की संभावना और अन्य जरूरी मेडिकल पैरामीटर की जांच की जा रही है। फिलहाल नवजात को विशेष निगरानी में रखा गया है और उसकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है।

पालना गृह में नवजात मिलने की सूचना मिलते ही अस्पताल प्रशासन ने नियमानुसार आगे की कार्रवाई शुरू की। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि पालना गृह ऐसी ही परिस्थितियों के लिए बनाया गया है, ताकि कोई भी व्यक्ति असहाय स्थिति में शिशु को सुरक्षित स्थान पर छोड़ सके और उसकी जान को खतरा न हो। इस व्यवस्था के तहत शिशु की पहचान गोपनीय रखी जाती है और तुरंत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।

 

मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने तुरंत बाल कल्याण समिति को सूचना दी। सूचना मिलते ही समिति के अध्यक्ष और सदस्य अस्पताल पहुंचे। बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष ने बताया कि सूचना मिलते ही समिति और अस्पताल स्टाफ मौके पर पहुंचा तथा शिशु की पूरी तरह निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि नवजात पूरी तरह सुरक्षित है और चिकित्सा टीम उसकी देखभाल कर रही है।

अध्यक्ष ने यह भी बताया कि नियमानुसार आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। शिशु की मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद उसे समिति के संरक्षण में लिया जाएगा और बाल संरक्षण से संबंधित सभी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। आवश्यकता पड़ने पर शिशु को अधिकृत अभिरक्षा गृह या दत्तक ग्रहण प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में बच्चे के हित को सर्वोपरि रखा जाता है और उसकी सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं भविष्य को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाता है।

अस्पताल प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि यदि किसी कारणवश कोई परिवार नवजात की परवरिश करने में असमर्थ हो, तो उसे असुरक्षित स्थान पर छोड़ने के बजाय पालना गृह जैसी सुरक्षित व्यवस्था का उपयोग करें, ताकि बच्चे का जीवन सुरक्षित रह सके। फिलहाल डॉक्टरों की टीम नवजात की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और सभी आवश्यक जांचें की जा रही हैं।

घटना के बाद अस्पताल परिसर में चर्चा का माहौल बना रहा, वहीं प्रशासनिक अमला पूरे मामले पर सतर्क है। नवजात की हालत फिलहाल स्थिर है और उसे पूर्ण चिकित्सकीय देखरेख में रखा गया है। बाल कल्याण समिति द्वारा आगे की कार्रवाई प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी।

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