खुद बुलडोजर हो गए हैं, आओ भिड़ो” – शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के तीखे तेवर, सरकार से लेकर विपक्ष तक पर साधा निशाना

 

काशी। प्रयागराज माघ मेला से लौटकर काशी पहुंचे ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने एक बार फिर अपने बेबाक और आक्रामक तेवरों से सियासी और धार्मिक हलकों में हलचल मचा दी है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने गौ हत्या, माघ मेला विवाद, UGC के नए नियम, केंद्र सरकार, विपक्षी नेताओं और प्रदेश सरकार के रवैये पर खुलकर अपनी बात रखी। उनके बयान न सिर्फ तीखे थे, बल्कि सीधे टकराव की चेतावनी भी देते नजर आए।

गौ हत्या के मुद्दे पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बेहद सख्त लहजे में कहा, “अब हम खुद बुलडोजर हो गए हैं, आओ भिड़ो। जो भी गौ हत्यारा सामने आएगा, उसके ऊपर बुलडोजर चलेगा।” उन्होंने कहा कि गौ माता की रक्षा के लिए अब केवल बयान नहीं, बल्कि ठोस और निर्णायक कदम उठाने का समय आ गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गौ रक्षा कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि सनातन धर्म और हिंदू समाज की आत्मा से जुड़ा प्रश्न है।

माघ मेला विवाद को लेकर शंकराचार्य ने प्रशासन और सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में न तो किसी पुलिसकर्मी पर कार्रवाई हुई, न ही किसी तरह की निष्पक्ष जांच कराई गई और न ही उन्हें न्याय मिला। “सब अपनी-अपनी गलती छिपाने में लगे हैं, कोई भी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है,” उन्होंने कहा। शंकराचार्य ने दो टूक कहा कि उनकी आवाज को दबाया नहीं जा सकता और वह आगे की रणनीति बनाकर आंदोलन को और तेज करेंगे।

UGC के नए नियमों पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि एक ही समाज को अलग-अलग जातियों और वर्गों में बांटकर आपस में लड़ाने का प्रयास किया जा रहा है। “जब समाज आपस में ही उलझा रहेगा, तो सनातन धर्म की मूल एकता टूटेगी और उसका सीधा फायदा धर्म विरोधी ताकतों को मिलेगा,” उन्होंने चेतावनी दी। शंकराचार्य ने कहा कि शिक्षा नीति के नाम पर ऐसी व्यवस्थाएं लागू की जा रही हैं, जो आने वाली पीढ़ियों को अपनी परंपरा और संस्कृति से दूर कर देंगी।

गृह मंत्री अमित शाह के हालिया बयान पर पलटवार करते हुए शंकराचार्य ने बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि “सरकार मंचों से अच्छी-अच्छी बातें कर रही है, लेकिन ज़मीन पर हालात बिल्कुल अलग हैं। ऐसा लगता है कि सरकार अपने ही डेथ वारंट पर साइन कर रही है।” उन्होंने कहा कि यदि जनता की आस्था और धार्मिक भावनाओं को लगातार नजरअंदाज किया गया, तो इसका राजनीतिक खामियाजा भी भुगतना पड़ेगा।

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा प्रयागराज की घटना को “अनिष्टकारी” बताए जाने पर भी शंकराचार्य ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि शास्त्रों के अनुसार यज्ञ की पूर्णाहुति शंकराचार्य के स्नान से मानी जाती है, जो इस बार नहीं हो सकी। “इसी कारण अनिष्ट हुआ। इसे अखिलेश यादव भी समझते हैं, तभी उन्होंने ऐसा बयान दिया,” शंकराचार्य ने कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई व्यक्तिगत विषय नहीं, बल्कि धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा प्रश्न है।

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य द्वारा दूरी बनाए जाने के सवाल पर शंकराचार्य ने तंज कसते हुए कहा कि सरकार का हिस्सा होने के नाते उन्हें साहस दिखाना चाहिए था। “भेजे जाने पर आने जैसी बात विवेकहीनता को दर्शाती है,” उन्होंने कहा। शंकराचार्य ने संकेत दिए कि सत्ता में रहते हुए भी यदि कोई धर्म और समाज के सवालों पर चुप रहता है, तो वह अपने कर्तव्य से विमुख होता है।

रायबरेली में लगे विवादित पोस्टरों पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि “ये वही लोग हैं जो गौ हत्या के पैसों से अपनी राजनीति चमकाते हैं।” उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप कभी सिद्ध नहीं हो पाएंगे। “जो लोग आरोप लगा रहे हैं, उन्हें पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए,” उन्होंने कहा।

भविष्य की रणनीति को लेकर शंकराचार्य ने बड़ा संकेत देते हुए कहा कि चारों शंकराचार्यों के समर्थन से गौ रक्षा को प्राथमिक मुद्दा बनाकर एक व्यापक आंदोलन चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सड़क से लेकर समाज के हर स्तर पर जागरूकता और दबाव बनाया जाएगा। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने साफ किया कि चाहे सरकार हो या विपक्ष, जो भी गौ माता और सनातन धर्म के खिलाफ खड़ा होगा, उसका खुलकर विरोध किया जाएगा।

कुल मिलाकर, काशी पहुंचते ही शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के तीखे तेवर यह संकेत दे रहे हैं कि आने वाले दिनों में धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक मोर्चे पर टकराव और तेज हो सकता है। उनके बयान न सिर्फ सरकार के लिए चुनौती हैं, बल्कि विपक्ष के लिए भी असहज स्थिति पैदा करने वाले माने जा रहे हैं।

 

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