
झालावाड़ जिले में नए साल का आग़ाज़ इस बार आस्था और सौहार्द की खुशबू के साथ हुआ। वर्ष 2026 के पहले दिन जिलेभर के लोगों ने सुबह-सवेरे आस्तानों, धार्मिक स्थलों और ऐतिहासिक जगहों का रुख किया। खासतौर पर गागरोन क्षेत्र स्थित सूफी संत हजरत ख्वाजा हमीदुद्दीन चिश्ती उर्फ मिठ्ठे महावली की दरगाह पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। यहां हजारों की संख्या में लोग अपने परिवार के साथ पहुंचे और नए साल की शुरुआत अमन-चैन, सुख-समृद्धि और खुशहाली की दुआओं के साथ की।
झालावाड़ शहर से लगभग चार किलोमीटर दूर स्थित मिठ्ठे महावली की दरगाह पर अलसुबह से ही चहल-पहल शुरू हो गई थी। श्रद्धालु मखमली चादरें, अकीदत के नजराने और फूल लेकर दरगाह पहुंचे। किसी ने अपने परिवार की सलामती की मन्नत मांगी तो किसी ने कारोबार में तरक्की और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की दुआ की। दरगाह परिसर में सूफियाना रूहानियत और भाईचारे का वातावरण देखने को मिला। लोग एक-दूसरे को नए साल की मुबारकबाद देते नजर आए और दरगाह पर देश-दुनिया में अमन कायम रहने की सामूहिक दुआएं मांगी गईं।
दरगाह के खादिमों और स्थानीय इंतजामिया कमेटी की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। साफ-सफाई, पानी, बैठने की जगह और मार्गदर्शन की व्यवस्था ने लोगों को सहज अनुभव दिया। कई परिवारों ने दरगाह परिसर में कुछ समय ठहरकर इबादत की और फिर नए साल के दिन की शुरुआत सादगी और सुकून के साथ की।
नए साल के जश्न का रंग केवल दरगाह तक सीमित नहीं रहा। जिले के अलग-अलग हिस्सों में लोग अपने-अपने तरीके से उत्सव मनाते नजर आए। कोई मंदिरों और गुरुद्वारों में माथा टेकने पहुंचा, तो किसी ने दोस्तों और परिजनों के साथ पिकनिक का कार्यक्रम बनाया। खासतौर पर ऐतिहासिक गागरोन किला और इसके आसपास के क्षेत्रों में पर्यटकों और स्थानीय लोगों की भीड़ दिखी। किले की प्राचीरों के बीच फोटो खिंचवाते परिवार, बच्चों की खिलखिलाहट और प्रकृति के बीच बिताया गया समय नए साल के उल्लास को और खास बना रहा था।
कुछ युवाओं और परिवारों ने नदी किनारे पिकनिक मनाई, जहां पारंपरिक व्यंजनों के साथ हल्का-फुल्का संगीत और खेलकूद का आनंद लिया गया। वहीं, शहर के कुछ इलाकों में डीजे की धुनों पर युवाओं ने जमकर डांस किया। हालांकि प्रशासन और पुलिस की ओर से शांति व्यवस्था बनाए रखने और यातायात सुचारू रखने के लिए सतर्कता बरती गई, जिससे उत्सव सुरक्षित और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हो सका।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नए साल के पहले दिन धार्मिक और सामाजिक स्थलों पर जाकर मन की शांति मिलती है और सालभर के लिए सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। दरगाह पर पहुंचे कई श्रद्धालुओं ने बताया कि वे हर साल नए वर्ष की शुरुआत यहां आकर करते हैं, क्योंकि मिठ्ठे महावली की दरगाह अमन, मोहब्बत और भाईचारे का प्रतीक है। यहां आकर इंसान खुद को जोड़ता हुआ महसूस करता है और जीवन में अच्छे कार्य करने की प्रेरणा मिलती है।
व्यापारिक गतिविधियों की बात करें तो नए साल के मौके पर शहर के बाजारों में भी रौनक रही। फूलों, चादरों, मिठाइयों और उपहारों की दुकानों पर सुबह से ही खरीदारों की भीड़ नजर आई। होटल, रेस्टोरेंट और पर्यटन स्थलों पर भी अच्छी-खासी चहल-पहल रही, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिली।
कुल मिलाकर, झालावाड़ जिले में नववर्ष का जश्न आस्था, परंपरा और आधुनिक उल्लास का सुंदर संगम बनकर सामने आया। कहीं दुआओं की गूंज थी, कहीं हंसी-ठहाकों की आवाज, तो कहीं संगीत और नृत्य का रंग। यह कहा जा सकता है कि नए साल की धूम ने पूरे जिले को रंगीन और सकारात्मक बना दिया। लोगों ने बीते वर्ष की सीख के साथ नए साल में बेहतर भविष्य की उम्मीदें संजोईं और आपसी सौहार्द के संदेश के साथ साल 2026 का स्वागत किया।