चित्तौड़गढ़।
मेवाड़ के सुप्रसिद्ध कृष्ण धाम श्री सांवलिया सेठ मंदिर में नववर्ष के पहले दिन आस्था और श्रद्धा का ऐसा अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसने न सिर्फ श्रद्धालुओं बल्कि प्रशासन को भी चौंका दिया। गुरुवार को अलसुबह से ही देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं का सैलाब मंदिर परिसर की ओर उमड़ पड़ा। अनुमान के अनुसार आठ लाख से अधिक भक्तों ने भगवान सांवलिया सेठ के दर्शन कर नववर्ष की मंगल कामना की। मान्यता है कि साल के पहले दिन सेठजी के दर्शन करने से पूरा वर्ष सुख-समृद्धि और शांति से बीतता है। इसी आस्था और विश्वास के साथ श्रद्धालु नाचते-गाते, भजन-कीर्तन करते और नंगे पांव मंदिर तक पहुंचे।
नववर्ष की पूर्व संध्या से ही मंदिर मार्गों पर भक्तों की भीड़ जुटने लगी थी। कई श्रद्धालु रातभर लाइन में खड़े रहकर सुबह के दर्शन की प्रतीक्षा करते नजर आए। जैसे ही मंगला आरती के बाद मंदिर के पट खुले, “जय सांवलिया सेठ” के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। ढोल-नगाड़ों, भजनों और जयकारों के बीच श्रद्धालु अपने आराध्य के दर्शन कर भाव-विभोर हो उठे।
सुगम दर्शन की विशेष व्यवस्था
इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए मंदिर मंडल और प्रशासन ने इस बार विशेष इंतजाम किए। पहली बार मीरा सर्किल से मुख्य मंदिर तक चार घुमावदार कतारें बनाई गईं, ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और दर्शन सुचारू रूप से हो सकें। यह प्रयोग सफल रहा और अधिकांश श्रद्धालुओं को अपेक्षाकृत कम समय में दर्शन का अवसर मिला।
बीमार, बुजुर्ग और महिला श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अलग से कार्मिक तैनात किए गए थे। जरूरतमंदों के लिए व्हीलचेयर की व्यवस्था भी की गई, जिससे उन्हें कतारों में परेशानी न हो। कतारों में खड़े भक्तों के लिए जगह-जगह आरओ पेयजल की व्यवस्था की गई थी। साथ ही प्राथमिक चिकित्सा केंद्र और एंबुलेंस भी तैनात रहीं, ताकि किसी आपात स्थिति में तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
सुरक्षा और प्रशासनिक मुस्तैदी
नववर्ष पर उमड़ी भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस बल की पर्याप्त तैनाती रही। सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही थी। यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए अलग-अलग पार्किंग स्थल निर्धारित किए गए थे और स्वयंसेवकों की मदद से वाहनों को नियंत्रित किया गया।
प्रशासनिक अधिकारियों ने पूरे दिन व्यवस्थाओं का जायजा लिया और समय-समय पर जरूरी निर्देश दिए। स्वयंसेवी संस्थाओं और स्थानीय लोगों ने भी सेवा भाव से श्रद्धालुओं की मदद की। कहीं पानी पिलाया जा रहा था तो कहीं कतार में खड़े बुजुर्गों को सहारा दिया जा रहा था।
श्रद्धालुओं की आस्था और भावनाएं
देश के विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने बताया कि वे हर साल नववर्ष की शुरुआत सांवलिया सेठ के दर्शन से करना चाहते हैं। कई भक्त परिवार सहित पहुंचे तो कई युवा मित्रों के साथ भक्ति में डूबे नजर आए। कुछ श्रद्धालु अपने मनोकामना पूरी होने पर धन्यवाद देने पहुंचे थे तो कई नए संकल्प और कामनाओं के साथ दरबार में शीश नवाने आए।
भक्तों का कहना था कि इतनी बड़ी भीड़ के बावजूद व्यवस्थाएं बेहतर रहीं और दर्शन अपेक्षाकृत सुगम रहे। कई श्रद्धालुओं ने मंदिर मंडल और प्रशासन की सराहना करते हुए कहा कि यदि ये इंतजाम न होते तो इतनी बड़ी संख्या में दर्शन कर पाना संभव नहीं था।
दान-पात्रों में उमड़ा भक्ति का सैलाब
नववर्ष के पहले दिन दान-पात्रों में भी श्रद्धालुओं ने खुले दिल से भेंट अर्पित की। नकद, सोना-चांदी और अन्य भेंटों के रूप में श्रद्धालुओं ने अपनी श्रद्धा प्रकट की। मंदिर मंडल के अनुसार दान की गणना बाद में की जाएगी, लेकिन शुरुआती अनुमान के मुताबिक दान की राशि भी उल्लेखनीय रही।
भक्तिमय माहौल से गूंजा क्षेत्र
- पूरे दिन मंदिर और आसपास का क्षेत्र भक्ति, उल्लास और अनुशासन का उदाहरण बना रहा। भजनों की धुन, जयकारों की गूंज और श्रद्धालुओं की अपार आस्था ने यह स्पष्ट कर दिया कि श्री सांवलिया सेठ का दरबार आज भी करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। नववर्ष के पहले दिन यहां उमड़ा जनसैलाब न केवल धार्मिक विश्वास का प्रतीक बना, बल्कि यह भी दिखा गया कि सुनियोजित व्यवस्थाओं से इतनी बड़ी भीड़ को भी सफलतापूर्वक संभाला जा सकता है।