
सीहोर। मध्यप्रदेश के सीहोर जिले के ग्राम खोखरी निवासी सविता पेरवाल ने वर्ष 2021 से लेकर अब तक B. Pharmacy की पढ़ाई सफलतापूर्वक पूर्ण कर एक मिसाल कायम की है। साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि और सीमित संसाधनों के बावजूद सविता ने कभी अपने सपनों को कमजोर नहीं पड़ने दिया। निरंतर मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने फार्मेसी जैसे चुनौतीपूर्ण कोर्स में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए अपनी अलग पहचान बनाई है। उनका यह शैक्षणिक सफर न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र के युवाओं और विशेषकर छात्राओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।
सविता पेरवाल, पिता शिव नारायण, ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही पूरी की। ग्रामीण परिवेश, सीमित सुविधाएं और आर्थिक चुनौतियों के बीच पढ़ाई जारी रखना आसान नहीं था, लेकिन सविता ने कठिन परिस्थितियों को कभी बाधा नहीं बनने दिया। उन्होंने शुरू से ही यह ठान लिया था कि शिक्षा के माध्यम से वह अपने और अपने परिवार के भविष्य को बेहतर बनाएंगी। इसी दृढ़ निश्चय के साथ उन्होंने B. Pharmacy जैसे प्रोफेशनल कोर्स में प्रवेश लिया और अपनी मेहनत से हर चुनौती का सामना किया।
वर्ष 2021 में B. Pharmacy की पढ़ाई शुरू करने के बाद सविता को कोविड-19 महामारी जैसी अभूतपूर्व परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। इस दौरान देश की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से प्रभावित हुई। कॉलेज बंद रहे, कक्षाएं ऑनलाइन हुईं और विद्यार्थियों के सामने कई नई समस्याएं खड़ी हो गईं। इंटरनेट कनेक्टिविटी, ऑनलाइन पढ़ाई की आदत और प्रैक्टिकल ज्ञान की कमी जैसी चुनौतियां आम थीं, लेकिन सविता ने इन हालात को अवसर में बदल दिया। उन्होंने ऑनलाइन कक्षाओं को गंभीरता से लिया, स्वयं अध्ययन पर विशेष ध्यान दिया और समय प्रबंधन के जरिए पढ़ाई को निरंतर जारी रखा।
ऑनलाइन पढ़ाई के साथ-साथ जब परिस्थितियां सामान्य हुईं और ऑफलाइन कक्षाएं प्रारंभ हुईं, तब भी सविता ने पूरे उत्साह और समर्पण के साथ पढ़ाई की। प्रैक्टिकल ट्रेनिंग, लैब वर्क, प्रोजेक्ट वर्क, सेमिनार और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों में उनकी सक्रिय भागीदारी रही। फार्मेसी जैसे तकनीकी विषय में थ्योरी के साथ-साथ प्रैक्टिकल ज्ञान अत्यंत आवश्यक होता है, और सविता ने इस संतुलन को बखूबी साधा। उनके शिक्षकों और सहपाठियों के अनुसार सविता हमेशा सीखने के लिए तत्पर रहती थीं और हर विषय को गहराई से समझने का प्रयास करती थीं।
IES University में अध्ययन के दौरान सविता ने न केवल अकादमिक रूप से अच्छा प्रदर्शन किया, बल्कि अनुशासन और जिम्मेदारी का भी उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने समय पर असाइनमेंट पूरे किए, समूह कार्यों में नेतृत्व दिखाया और सेमिनारों में आत्मविश्वास के साथ अपने विचार रखे। इन सभी अनुभवों ने उन्हें फार्मेसी क्षेत्र में मजबूत तकनीकी और व्यावहारिक ज्ञान प्रदान किया, जो उनके भविष्य के करियर के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा।
सविता की इस सफलता में उनके माता-पिता का योगदान भी अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। पिता शिव नारायण और परिवार के अन्य सदस्यों ने हर कदम पर उनका साथ दिया। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने सविता की शिक्षा को प्राथमिकता दी और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। सविता स्वयं मानती हैं कि यदि परिवार का सहयोग और विश्वास न होता, तो यह सफर इतना आसान नहीं होता। उनकी यह उपलब्धि उनके माता-पिता के त्याग, समर्थन और संस्कारों का प्रतिफल है।
सविता पेरवाल की सफलता यह भी सिद्ध करती है कि बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया कि कड़ी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के बल पर ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाली छात्राएं भी उच्च शिक्षा प्राप्त कर अपने सपनों को साकार कर सकती हैं। उनका यह शैक्षणिक सफर समाज में सकारात्मक संदेश देता है और उन परिवारों के लिए प्रेरणा है, जो आज भी बेटियों की शिक्षा को लेकर संकोच में रहते हैं।

आज सविता पेरवाल का नाम न केवल उनके गांव खोखरी, बल्कि पूरे सीहोर जिले में गर्व के साथ लिया जा रहा है। उनका यह सफर आने वाली पीढ़ियों के लिए एक उदाहरण है कि परिस्थितियां कैसी भी हों, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो सफलता अवश्य मिलती है। सविता का यह संघर्ष और सफलता की कहानी युवाओं को यह संदेश देती है कि शिक्षा ही वह माध्यम है, जो जीवन को नई दिशा और नई पहचान दे सकता है।
भविष्य में सविता फार्मेसी क्षेत्र में आगे बढ़कर समाज की सेवा करना चाहती हैं। उनकी यह उपलब्धि निश्चित रूप से उन्हें नए अवसर प्रदान करेगी और वह अपने ज्ञान व अनुभव से न केवल अपना, बल्कि अपने क्षेत्र और समाज का नाम भी रोशन करेंगी। सविता पेरवाल का यह प्रेरणादायी शैक्षणिक सफर आज के युवाओं के लिए एक सशक्त संदेश है कि दृढ़ संकल्प और निरंतर परिश्रम से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।