संगठित अपराध पर कड़ा प्रहार: BNS की धारा 112 में सट्टा गिरोह पर कार्रवाई

झालरापाटन (झालावाड़)।

जिले में अवैध जुआ-सट्टा और संगठित अपराध के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत झालरापाटन पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई कानूनी और सामाजिक दोनों दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस मामले में पुलिस ने पहली बार सट्टा जैसे अपराध को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 112 के अंतर्गत संगठित अपराध मानते हुए सख्त कार्रवाई की है, जो भविष्य में ऐसे अपराधियों के लिए एक कड़ा संदेश है।

जिला पुलिस अधीक्षक अमित कुमार के निर्देशानुसार 20 जनवरी को थाना झालरापाटन पुलिस ने पशुपतिनाथ मंदिर के पीछे दबिश देकर सट्टा खाईवाली करते हुए तीन आरोपियों—हरिशंकर, चेतन एवं नरेन्द्र कुमार—को रंगे हाथों गिरफ्तार किया। आरोपियों के कब्जे से ₹6000 नकद सट्टा राशि, 3 कैलकुलेटर, 10 मोबाइल फोन तथा सट्टे का विस्तृत हिसाब बरामद किया गया।

इस कार्रवाई का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि गिरफ्तार अभियुक्तों में से दो—हरिशंकर और नरेन्द्र कुमार—का पूर्व से आपराधिक इतिहास रहा है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार हरिशंकर के विरुद्ध पूर्व में हत्या के प्रयास (धारा 307) सहित राजस्थान जुआ अध्यादेश के करीब 11 प्रकरण दर्ज हैं। वहीं नरेन्द्र कुमार भी पूर्व में कई बार सट्टा अधिनियम के तहत पकड़ा जा चुका है। इसके बावजूद दोनों आरोपी लगातार संगठित रूप से सट्टा गतिविधियों को संचालित कर रहे थे।

पुलिस जांच में सामने आया कि यह गिरोह अलग-अलग मोहल्लों से आकर एक संगठित इकाई के रूप में काम करता था। गिरोह का नेटवर्क इतना मजबूत था कि कुछ लोग मौके पर नकद राशि लगाते थे, जबकि कई लोग मोबाइल फोन के माध्यम से ऑनलाइन सट्टा लगवाकर डिजिटल भुगतान करते थे। असनावर निवासी चेतन इस पूरे नेटवर्क में प्रमुख सहयोगी की भूमिका निभा रहा था, जो अलग-अलग क्षेत्रों से सट्टा लगाने वालों को जोड़ने का काम करता था।

यह पूरी कार्रवाई अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भागचन्द मीणा के निर्देशन एवं पुलिस उप अधीक्षक हर्षराज सिंह खरेडा के सुपरविजन में की गई। थाना झालरापाटन की थानाधिकारी अल्का के नेतृत्व में गठित टीम ने योजनाबद्ध तरीके से दबिश देकर इस संगठित गिरोह को धर दबोचा।

इस ऑपरेशन में उप निरीक्षक सुनील कुमार, हेड कांस्टेबल प्रीतम सिंह, सीताराम, कांस्टेबल पवन कुमार, मुकेश कुमार, विजय सिंह, महिला कांस्टेबल धन्नी तथा चालक प्रवीण कुमार की सराहनीय भूमिका रही। इसके अलावा इस पूरे मामले में आसूचना अधिकारी करण सिंह की विशेष भूमिका मानी जा रही है, जिनकी सटीक और समय पर दी गई जानकारी के आधार पर पुलिस इस संगठित गिरोह तक पहुंचने में सफल रही।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि धार्मिक स्थलों के आसपास इस प्रकार की अवैध गतिविधियां न केवल कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि सामाजिक और धार्मिक भावनाओं को भी ठेस पहुंचाती हैं। इस कार्रवाई ने स्पष्ट कर दिया है कि धार्मिक स्थलों की पवित्रता बिगाड़ने वाले और समाज में अपराध का जहर घोलने वाले संगठित गिरोहों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

झालावाड़ जिला पुलिस ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में जुआ-सट्टा, मादक पदार्थ तस्करी और अन्य संगठित अपराधों के खिलाफ इसी तरह सख्त कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि जिले में कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जा सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *