मनोहरथाना ब्लॉक में 26 विद्यालय शिप्ट, बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा पर मंडराया संकट

  1. झालावाड़। एक ओर राज्य सरकार अपने दो वर्ष के कार्यकाल की उपलब्धियां गिना रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत यह है कि जर्जर विद्यालय भवनों का स्थायी समाधान अब तक नहीं हो सका है। पिपलोदी हादसे के बाद जिन स्कूल भवनों को जर्जर घोषित किया गया था, उन्हें समय रहते ध्वस्त कर नए भवनों का निर्माण नहीं किया गया। इसका नतीजा यह हुआ कि झालावाड़ जिले के मनोहरथाना ब्लॉक में करीब 26 सरकारी विद्यालयों को पास के अन्य विद्यालयों में शिप्ट करना पड़ा है। इस फैसले से हजारों बच्चों की पढ़ाई, सुरक्षा और अभिभावकों की चिंताएं एक बार फिर बढ़ गई हैं।

जानकारी के अनुसार, मनोहरथाना ब्लॉक के जिन विद्यालयों को जर्जर घोषित किया गया था, वहां पढ़ने वाले बच्चों को अब 10 जनवरी के बाद दूसरे स्कूलों में जाना होगा। कई गांवों में बच्चों को अपने मूल विद्यालय के बजाय 3 से 4 किलोमीटर दूर स्थित स्कूलों में पढ़ने के लिए भेजा जाएगा। शिक्षा विभाग के इस निर्णय को लेकर अभिभावकों और ग्रामीणों में नाराजगी देखी जा रही है। ब्लॉक स्तर पर 26 विद्यालयों को शिप्ट किया गया है, जिनमें से 13 विद्यालयों द्वारा औपचारिक रूप से आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं।

“विद्यालय शिप्ट करने से बढ़ी मुसीबत”

अभिभावकों का कहना है कि छोटे-छोटे बच्चों के लिए रोज 3 से 4 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल पहुंचना आसान नहीं है। खासकर प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों को सड़क मार्ग से होकर गुजरना पड़ेगा, जहां वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। इससे हादसों की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। ग्रामीणों का कहना है कि पहले ही बच्चों की सुरक्षा को लेकर मन में डर बैठा हुआ है और अब दूरी बढ़ने से यह चिंता और गहरी हो गई है।

पिपलोदी हादसे की टीस अब भी बरकरार

25 जुलाई को हुए पिपलोदी हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया था। पिपलोदी में एक जर्जर विद्यालय भवन की छत अचानक गिर गई थी, जिससे 7 मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई थी, जबकि करीब 23 बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस घटना के बाद प्रशासन और शिक्षा विभाग ने जर्जर भवनों को चिन्हित तो किया, लेकिन उन्हें ध्वस्त कर नए भवन बनाने की प्रक्रिया धीमी रही। हादसे की यादें आज भी अभिभावकों के मन में ताजा हैं, जिसके चलते वे बच्चों को स्कूल भेजने से पहले कई बार सोचने को मजबूर हैं।

पढ़ाई पर पड़ेगा सीधा असर

 

 

 

विद्यालय शिप्ट होने से बच्चों की नियमित पढ़ाई पर सीधा असर पड़ने की आशंका है। फरवरी माह से बोर्ड परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को नए स्कूल, नए शिक्षक और नए माहौल में ढलने में समय लगेगा। शिक्षकों का मानना है कि अचानक स्कूल बदलने से बच्चों की एकाग्रता प्रभावित होती है और पाठ्यक्रम पूरा करने में भी दिक्कतें आती हैं। कई विद्यालयों में पहले से ही कक्षाओं का दबाव है, ऐसे में अतिरिक्त बच्चों के आने से व्यवस्थाएं और बिगड़ सकती हैं।

अभिभावकों की बढ़ी जिम्मेदारी और परेशानी

दूर स्थित विद्यालयों में बच्चों को भेजना अभिभावकों के लिए भी बड़ी चुनौती बन गया है। कई परिवार आर्थिक रूप से इतने सक्षम नहीं हैं कि रोज बच्चों को वाहन से स्कूल छोड़ सकें। ग्रामीण इलाकों में सार्वजनिक परिवहन की सुविधा भी सीमित है। ऐसे में या तो बच्चों को पैदल भेजना होगा या अभिभावकों को अपने काम छोड़कर बच्चों के साथ जाना पड़ेगा। इससे उनकी रोजमर्रा की आजीविका पर भी असर पड़ सकता है।

आपत्तियां दर्ज, समाधान की मांग

शिक्षा विभाग के इस फैसले के खिलाफ 13 विद्यालयों द्वारा आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। आपत्तियों में मुख्य रूप से दूरी अधिक होने, बच्चों की सुरक्षा, परिवहन की कमी और पढ़ाई बाधित होने जैसे कारण बताए गए हैं। ग्रामीणों और अभिभावकों की मांग है कि या तो अस्थायी रूप से गांव में ही सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था की जाए या फिर बच्चों के लिए परिवहन की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

शिक्षा विभाग का पक्ष

इस पूरे मामले पर ब्लॉक शिक्षा अधिकारी दुलीचंद लोधा ने बताया कि मनोहरथाना ब्लॉक में करीब 26 विद्यालयों को पास के विद्यालयों में शिप्ट किया गया है। इनमें से 13 विद्यालयों की ओर से आपत्तियां प्राप्त हुई हैं, जो मुख्य रूप से दूरी अथवा अन्य कारणों को लेकर हैं। सभी आपत्तियों को उच्च अधिकारियों को भेज दिया गया है। जैसे ही वहां से निर्देश प्राप्त होंगे, उसी अनुसार नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

स्थायी समाधान की दरकार

स्थानीय जनप्रतिनिधियों, शिक्षाविदों और अभिभावकों का कहना है कि जर्जर विद्यालय भवनों की समस्या का स्थायी समाधान जरूरी है। केवल शिप्ट करना समाधान नहीं है। समयबद्ध तरीके से पुराने भवनों को गिराकर नए, सुरक्षित और आधुनिक स्कूल भवनों का निर्माण किया जाना चाहिए। साथ ही, जब तक नए भवन नहीं बनते, तब तक बच्चों की सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता देते हुए अस्थायी इंतजाम किए जाने चाहिए।

कुल मिलाकर, मनोहरथाना ब्लॉक में 26 विद्यालयों का शिप्ट होना शिक्षा व्यवस्था की मजबूरी को तो दर्शाता है, लेकिन इसके दुष्परिणाम बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों पर साफ नजर आ रहे हैं। अब सभी की निगाहें प्रशासन और शिक्षा विभाग पर टिकी हैं कि वह इस गंभीर समस्या का स्थायी और सुरक्षित समाधान कब तक करता है।

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