
झालावाड़ जिले के असनावर ने रचा नया इतिहास, ‘गागरोनी तोता साड़ी’ ने बढ़ाया क्षेत्र का मान
झालावाड़। झालावाड़ जिले के असनावर कस्बे ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि यह क्षेत्र केवल ऐतिहासिक धरोहरों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी कला, संस्कृति और कारीगरी के लिए भी पूरे प्रदेश में अलग पहचान रखता है। आपने गागरोन का नाम रोशन करने वाली कई कहानियां सुनी होंगी, कभी वीरता की, कभी स्थापत्य की, तो कभी परंपराओं की। अब इसी कड़ी में असनावर के एक साधारण से बुनकर ने अपनी मेहनत, हुनर और कल्पनाशीलता से “गागरोनी तोता साड़ी” बुनकर न केवल असनावर बल्कि पूरे झालावाड़ जिले का नाम रोशन कर दिया है।

असनावर क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से गागरोन दुर्ग से जुड़ा हुआ है, जो यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल है। इसी गागरोन की पहचान, उसकी हरियाली, वहां गूंजती लोकसंस्कृति और प्रकृति से प्रेरणा लेकर एक स्थानीय बुनकर ने साड़ी में “तोते” की अनूठी आकृति उकेरी। यह साड़ी आज “गागरोनी तोता साड़ी” के नाम से पहचानी जाने लगी है।
बताया जाता है कि यह बुनकर पीढ़ियों से हथकरघा बुनाई के काम से जुड़ा हुआ है। आधुनिक समय में जब मशीनों का दौर चल रहा है और हस्तशिल्प धीरे-धीरे सिमटता जा रहा है, ऐसे समय में इस बुनकर ने पारंपरिक करघे पर अपनी कला को जीवित रखा। उसने गागरोन क्षेत्र में पाए जाने वाले हरे-भरे जंगलों और वहां चहचहाते तोतों से प्रेरणा लेकर साड़ी का डिजाइन तैयार किया। हरे, लाल और पीले रंगों के संयोजन से बनी इस साड़ी में तोते की आकृति इतनी सजीव दिखाई देती है कि देखने वाला ठहरकर उसे निहारने को मजबूर हो जाता है।
गागरोनी तोता साड़ी की खास बात यह है कि इसे पूरी तरह हाथ से बुना जाता है। एक साड़ी तैयार करने में कई दिन लग जाते हैं। बुनकर पहले कागज पर डिजाइन तैयार करता है, फिर धागों का चयन करता है और उसके बाद करघे पर बारीकी से काम शुरू होता है। जरा-सी चूक पूरी मेहनत पर पानी फेर सकती है, इसलिए इस काम में धैर्य, एकाग्रता और अनुभव की बहुत आवश्यकता होती है। यही कारण है कि ऐसी साड़ियां बहुत कम संख्या में बन पाती हैं, लेकिन उनकी मांग लगातार बढ़ती जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले जहां असनावर को केवल कस्बे के रूप में जाना जाता था, अब गागरोनी तोता साड़ी के कारण इसकी पहचान एक कला केंद्र के रूप में भी बनने लगी है। आसपास के गांवों से लोग इस बुनकर का काम देखने आते हैं। कई लोग तो खासतौर पर यह साड़ी खरीदने के लिए असनावर पहुंच रहे हैं। धीरे-धीरे यह साड़ी शादियों, त्योहारों और विशेष आयोजनों में महिलाओं की पहली पसंद बनती जा रही है।