झालावाड़।
शहर में बुधवार सुबह एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां नगर परिषद के ठेकेदार प्रवीण चतुर्वेदी उर्फ राजू का शव एक निजी होटल के कमरे में पंखे से फंदे पर लटका मिला। बताया जा रहा है कि नगर परिषद झालावाड़ से लंबे समय से बकाया भुगतान नहीं मिलने के कारण वे गहरे मानसिक और आर्थिक तनाव में थे। इस घटना के बाद शहर में शोक और आक्रोश का माहौल है, वहीं नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार कोतवाली थाना पुलिस को सुबह करीब 10 बजे कोटा रोड स्थित एक निजी होटल से सूचना मिली कि होटल के एक कमरे में ठहरा गेस्ट रूम सर्विस के लिए दरवाजा नहीं खोल रहा है। बार-बार आवाज देने के बावजूद भीतर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इस पर होटल प्रबंधन ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची कोतवाली पुलिस ने जब दरवाजा खुलवाने की कोशिश की और अंदर से कोई जवाब नहीं मिला, तो दरवाजा तोड़कर कमरे में प्रवेश किया गया। अंदर का दृश्य देखकर सभी स्तब्ध रह गए। कमरे में प्रवीण चतुर्वेदी का शव पंखे से फंदे पर लटका हुआ था।
पुलिस ने तत्काल शव को नीचे उतरवाया और झालावाड़ जिला अस्पताल की मॉर्च्यूरी में रखवाया। मौके से एक सुसाइड नोट भी बरामद किया गया है, हालांकि पुलिस ने फिलहाल उसके बारे में कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर कार्रवाई की जाएगी।

परिजनों ने बताया कि प्रवीण चतुर्वेदी नगर परिषद के ठेकेदार थे और पिछले काफी समय से उनके बिल पास नहीं हो रहे थे। उनके भाई अमित चतुर्वेदी ने पुलिस को दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि करीब 35 लाख रुपए का भुगतान नगर परिषद की ओर से बकाया चल रहा था। भुगतान नहीं मिलने के कारण प्रवीण की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही थी। बैंक का लोन, बाजार से लिया गया उधार और अन्य देनदारियों का दबाव उन पर बढ़ता जा रहा था। वे लगातार नगर परिषद के चक्कर लगा रहे थे, लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लग रही थी।
परिजनों का कहना है कि बकाया भुगतान को लेकर प्रवीण पिछले कई महीनों से मानसिक तनाव में थे। घर में भी वे इसी विषय को लेकर चिंतित रहते थे। मंगलवार को वे घर से निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौटे। परिजनों ने सोचा कि किसी काम से बाहर गए होंगे, लेकिन बुधवार सुबह होटल में शव मिलने की सूचना से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
इस घटना के बाद न सिर्फ चतुर्वेदी परिवार, बल्कि पूरे शहर में शोक की लहर है। स्थानीय ठेकेदारों और आमजन में भी भारी रोष देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि नगर परिषद और अन्य सरकारी विभागों में ठेकेदारों के बिल लंबे समय तक लटकाए जाते हैं। समय पर भुगतान नहीं होने से ठेकेदार आर्थिक रूप से टूट जाते हैं और मानसिक दबाव इतना बढ़ जाता है कि वे इस तरह के कठोर कदम उठाने को मजबूर हो जाते हैं।
स्थानीय ठेकेदारों ने बताया कि यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई ठेकेदार भुगतान की समस्या को लेकर परेशान होते रहे हैं, लेकिन व्यवस्था में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ। उनका कहना है कि यदि समय रहते भुगतान कर दिया जाता, तो शायद एक परिवार उजड़ने से बच सकता था।
नगर परिषद झालावाड़ में पिछले लंबे समय से आयुक्त का पद खाली था और कार्यवाहक व्यवस्था के भरोसे काम चल रहा था। हाल ही में तीन-चार दिन पहले ही अशोक शर्मा ने नगर परिषद आयुक्त के रूप में ज्वाइन किया है। मामले में उनका पक्ष जानने के लिए जब उनसे संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या नए आयुक्त इस मामले में कोई संज्ञान लेंगे और बकाया भुगतान की व्यवस्था को लेकर ठोस कदम उठाए जाएंगे।
पुलिस ने परिजनों की रिपोर्ट के आधार पर मामला दर्ज कर शव का पोस्टमॉर्टम करवाया और बाद में शव परिजनों को सौंप दिया। कोतवाली पुलिस का कहना है कि सुसाइड नोट और परिजनों के बयानों के आधार पर जांच की जा रही है। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या दबाव की बात सामने आती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।